– संतों के अपमान से नाराज अखाड़ा परिषद ने खोला मोर्चा, कहा- सिंहस्थ से पहले मंदिर की व्यवस्थाएं सुधारें, प्रशासक को तत्काल हटाएं; उज्जैन में जुटेंगे प्रमुख अखाड़ों के संत, केंद्र सरकार तक पहुंचाएंगे मामला
उज्जैन।( स्वदेश mp न्यूज़ राजेश सिंह भदौरिया)ज्योतिर्लिंग भगवान महाकालेश्वर मंदिर में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष डॉ. रविंद्रपुरी महाराज के साथ दर्शन के दौरान हुए घटनाक्रम ने अब बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। मंदिर में रोकटोक, चेकिंग के नाम पर कथित बदसलूकी और संतों के सम्मान से जुड़े इस मामले में अब सीधे मंदिर प्रशासक पर कार्रवाई की मांग उठने लगी है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष डॉ. रविंद्रपुरी महाराज ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर महाकाल मंदिर प्रशासक को तत्काल पद से हटाने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर प्रशासन के अधिकारियों और कर्मचारियों के मनमाने रवैये से संत समाज आहत है। सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच इस तरह की घटनाएं सरकार की छवि को भी प्रभावित कर सकती हैं।
मुख्यमंत्री को पत्र भेजने के बाद डॉ. रविंद्रपुरी महाराज उज्जैन से दिल्ली रवाना हो गए। उन्होंने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि मामला केवल एक दिन के घटनाक्रम तक सीमित नहीं रहेगा। यदि मंदिर की व्यवस्थाओं और संतों के सम्मान को लेकर उचित कदम नहीं उठाए गए तो देशभर के प्रमुख अखाड़ों के साधु-संत उज्जैन में एकजुट होकर मंदिर प्रशासन के खिलाफ आवाज उठाएंगे। साथ ही पूरे मामले से केंद्र सरकार को भी अवगत कराया जाएगा।
प्रशासक की भूमिका पर उठाए सवाल, कार्रवाई की मांग
अखाड़ा परिषद अध्यक्ष की नाराजगी मंदिर में दर्शन के दौरान हुई रोकटोक और चेकिंग के तरीके को लेकर है। उनका आरोप है कि मंदिर में संतों के साथ सम्मानजनक व्यवहार नहीं किया गया। उन्होंने मंदिर प्रशासन पर मामले को दूसरी दिशा में ले जाने का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि सीसीटीवी फुटेज का चुनिंदा हिस्सा मीडिया को उपलब्ध कराकर पूरे घटनाक्रम की एकतरफा तस्वीर पेश करने की कोशिश की गई।
डॉ. रविंद्रपुरी महाराज ने अपने बयान में डॉ. राहुल कटारिया की छवि खराब करने के कथित प्रयासों पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की छवि को नुकसान पहुंचाने के लिए मंदिर प्रशासन की ओर से इस तरह का रवैया अपनाना उचित नहीं है। पूरे मामले में प्रशासक की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उन्होंने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
निरीक्षक हटाया, गार्डों की ड्यूटी भी बदली
विवाद सामने आने के बाद महाकाल मंदिर प्रशासन ने जलद्वार पर तैनात निरीक्षक जगदीश गोड़ को ड्यूटी से हटा दिया है। उनकी जगह निरीक्षक राजू मालवीय को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा घटनाक्रम के समय मौके पर तैनात निजी सुरक्षा गार्डों की ड्यूटी में भी फेरबदल किया गया है।
हालांकि अखाड़ा परिषद अध्यक्ष की नाराजगी केवल निरीक्षक या सुरक्षा गार्डों तक सीमित नहीं है। उनकी मुख्य मांग मंदिर प्रशासक को हटाने की है। ऐसे में निरीक्षक को हटाने और गार्डों की ड्यूटी बदलने की कार्रवाई से विवाद शांत होता नजर नहीं आ रहा है।
सिंहस्थ से पहले संतों की नाराजगी सरकार के लिए चुनौती
उज्जैन में वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ कुंभ को देखते हुए अखाड़ों और साधु-संतों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। सिंहस्थ की तैयारियों के बीच महाकाल मंदिर में संतों के सम्मान और व्यवस्थाओं को लेकर उठा विवाद प्रशासन के लिए नई चुनौती बन गया है। अखाड़ा परिषद अध्यक्ष के रुख से संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में यह मामला और गरमा सकता है। यदि प्रमुख अखाड़ों के संत एकजुट होकर उज्जैन पहुंचते हैं तो मंदिर प्रशासन के साथ सरकार को भी इस मुद्दे पर जवाब देना पड़ सकता है।
फिलहाल सबकी नजर मुख्यमंत्री की ओर से अखाड़ा परिषद अध्यक्ष के पत्र पर होने वाली कार्रवाई और मंदिर प्रशासन के अगले कदम पर टिकी है।
