भगवान धन्वंतरि के प्राकट्य का पर्व, हस्त नक्षत्र के महासंयोग में मनेगा धनतेरस पर्व

उज्जैन।(स्वदेश mp न्यूज़… राजेश सिंह भदौरिया बंटी) आगामी कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी धनतेरस का महापर्व आज 6 नवंबर शुक्रवार को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस बार धनतेरस पर शुक्रवार और हस्त नक्षत्र का विशेष संयोग बन रहा है।
ज्योतिषाचार्य पं. चंदन श्यामनारायण व्यास ने बताया कि शुक्रवार माता लक्ष्मी का प्रिय वार है। वहीं हस्त नक्षत्र को कला, कौशल, व्यापार, निर्माण और क्रय-विक्रय जैसे शुभ कार्यों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर की सुबह 10 बजकर 32 मिनट से प्रारंभ होकर 7 नवंबर की सुबह 10 बजकर 48 मिनट तक रहेगी। धनतेरस के दिन सूर्य तुला राशि में और चंद्रमा कन्या राशि में रहेगा। ज्योतिषीय दृष्टि से शुक्रवार का लक्ष्मी तत्व और हस्त नक्षत्र का कर्म-कौशल से जुड़ाव इस पर्व को विशेष बनाता है। इस दिन माता लक्ष्मी, भगवान धन्वंतरि और कुबेर देव की आराधना के साथ व्यापारिक प्रतिष्ठानों में बहीखाता, धन और उपकरणों का पूजन करना शुभ है। यह दिन भगवान धन्वंतरि के प्राकट्य का भी पर्व है, जो आरोग्यता और ऐश्वर्य दोनों को संरक्षित करने का संदेश देता है। धनतेरस पर प्रदोष काल में भगवान धन्वंतरि और माता लक्ष्मी का पूजन विशेष फलदायी रहता है।
चौघड़िया अनुसार शुभ मुहूर्त
सुबह 09.17 से 10.40 तक अमृत
दोपहर 12.05 से 01.27 तक शुभ
शाम 04.14 से 05.38 तक चल
रात 08.51 से 10.27 तक लाभ
मध्य रात्रि 12.04 से 01.41 तक शुभ
दुकान, फैक्ट्री, स्कूल, कॉलेज और व्यापार के लिए शुभ लग्न मुहूर्त
दोपहर 11.44 से 01.30 तक मकर लग्न
शाम 04.31 से 06.10 तक मेष लग्न
रात 10.22 से 12.39 तक कर्क लग्न
घर और प्रतिष्ठान के लिए शुभ लग्न मुहूर्त
दोपहर 01.30 से 03.01 तक कुंभ लग्न
शाम 06.10 से 08.08 तक वृषभ लग्न
मध्य रात्रि 12.39 से 02.53 तक सिंह लग्न
राहु काल में खरीदी से बचें
धनतेरस पर सुबह 10.40 से दोपहर 12.04 तक राहु काल रहेगा। ज्योतिषाचार्य पं. चंदन श्यामनारायण व्यास के अनुसार इस समय में खरीदी करने से बचना चाहिए। उन्होंने बताया कि धनतेरस का वास्तविक संदेश यही है कि मनुष्य के जीवन में धन के साथ धर्म और संपत्ति के साथ स्वास्थ्य का होना भी आवश्यक है। भगवान धन्वंतरि से आरोग्य, माता लक्ष्मी से समृद्धि और भगवान कुबेर से धन-धान्य की कामना करना ही इस पर्व की सच्ची सार्थकता है।