उज्जैन।(स्वदेश mp न्यूज़… राजेश सिंह भदौरिया बंटी) सिंहस्थ मेला क्षेत्र में सरकारी जमीन पर हो रहे अवैध निर्माण और अतिक्रमण को लेकर अखिल भारतीय मठ मंदिर सनातन धर्म मोर्चा ने प्रशासन पर भेदभावपूर्ण कार्रवाई का आरोप लगाया है। मोर्चा का कहना है कि प्रशासन अतिक्रमण हटाने में दोहरी नीति अपना रहा है। एक तरफ किसानों और कुछ चुनिंदा आश्रमों पर कार्रवाई की जा रही है, वहीं रसूखदार और सत्ता समर्थक लोगों के व्यावसायिक निर्माणों को बख्शा जा रहा है।
मोर्चा अध्यक्ष किशोर सिंह कुशवाह ने कहा कि सिंहस्थ भूमि केवल मेले के लिए आरक्षित है। इसके बावजूद शिप्रा नदी से लेकर बड़नगर रोड और मंगलनाथ क्षेत्र तक सरकारी भूमि पर मठ और आश्रम की आड़ में बड़े पैमाने पर लॉज, गेस्ट हाउस और गार्डन बनाकर व्यवसाय किया जा रहा है। हाल ही में प्रशासन ने कुछ आश्रमों और लॉज को हटाया है जो स्वागत योग्य है, लेकिन चिंतामण रोड स्थित शनि मंदिर के आसपास और पीछे की सरकारी भूमि पर कब्जा कर बनाए गए पक्के गेस्ट हाउसों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। कुशवाह ने बताया कि जिस भूमि पर शनि मंदिर बना है, वह भी सरकारी है। तत्कालीन कलेक्टर अजातशत्रु ने यहां से प्रतिमा हटाने के आदेश भी दिए थे।
प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कुशवाह ने पूछा कि जिन संतों के मठ तोड़े गए हैं, क्या वे कांग्रेस विचारधारा के थे और जिनके अतिक्रमण नहीं हटाए गए, क्या वे भाजपा का समर्थन करते हैं। प्रशासन को इस भेदभाव का जवाब देना चाहिए कि जब किसानों के अतिक्रमण हटाए जाते हैं तो साधु-संतों के नाम पर हुए व्यावसायिक अतिक्रमणों पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही।
ड्रोन सर्वे और व्यावसायिक उपयोग पर लगे रोक
मोर्चा ने प्रशासन के सामने अपनी प्रमुख मांगें रखते हुए कहा है कि सिंहस्थ क्षेत्र का ड्रोन और राजस्व रिकॉर्ड के माध्यम से संपूर्ण सर्वे कराया जाए। बिना किसी राजनीतिक भेदभाव के सभी अवैध आश्रम, लॉज, गेस्ट हाउस और गार्डन पर समान रूप से कार्रवाई कर सरकारी भूमि को कब्जामुक्त किया जाए। इसके साथ ही सिंहस्थ भूमि को केवल मेले के लिए सुरक्षित रखते हुए इसके व्यावसायिक उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।
सांकेतिक चित्र-
