घटना कहां हुई है?
मरीन ट्रैफिक के अनुसार, शारजाह के पास समुद्र में जहाजों के ठहरने की यह जगह संयुक्त अरब अमीरात के दुबई क्षेत्र में अरब की खाड़ी में स्थित है। यह घटना खाड़ी क्षेत्र और काला सागर में व्यापारिक जहाजों और नाविकों पर लगातार हो रहे हमलों की चिंताओं के बीच हुई है। इन घटनाओं के कारण भारत और अन्य देशों ने समुद्री व्यापार और जहाजों के चालक दल की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग मजबूत करने की मांग की है।
शुक्रवार को विदेश मंत्रालय ने जहाजों और नाविकों की सुरक्षा से जुड़े नवगठित ‘मित्र देशों के समूह’ (ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स ऑन सेफ्टी एंड सिक्योरिटी ऑफ शिपिंग एंड सीफेरर्स) के उद्देश्यों की जानकारी दी। इस पहल का मकसद समुद्री क्षेत्र से जुड़े पक्षों को एक साथ लाना है। इसका मकसद अंतरराष्ट्रीय सहयोग मजबूत करना है। साथ ही, वैश्विक चर्चाओं में नाविकों और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को प्रमुख मुद्दा बनाना है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि इस समूह का उद्देश्य व्यापारिक जहाजरानी और समुद्री उद्योग से जुड़े देशों के बीच तालमेल बनाना है। इसमें उन देशों को भी शामिल करना है, जहां बड़ी संख्या में लोग नाविक के रूप में काम करते हैं।
जायसवाल ने कहा, इसका विचार इन सभी को एक साथ लाना है। इससे हम नाविकों की सुरक्षा और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के मुद्दों को वैश्विक बहस और चर्चा के केंद्र में ला सकेंगे। हम अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी बढ़ा सकेंगे। इससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि व्यापारिक जहाजरानी प्रभावित न हो, जहाजों पर हमले न हों और नाविक सुरक्षित रहें।
सोनोवाल ने कहा, नौ अक्तूबर को पनामा के ध्वज वाले कच्चे तेल के टैंकर एमटी जेम नंबर 2 पर शारजाह के पास समुद्र में जहाजों के ठहरने की जगह पर ड्रोन से हमला किया गया। जहाज पर 22 भारतीय नागरिक सवार थे। मुझे यह बताते हुए राहत मिल रही है कि जहाज पर मौजूद हमारे सभी 22 भारतीय नाविक पूरी तरह सुरक्षित बताए गए हैं। उन्होंने आगे कहा, हम स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं। अपने नाविकों की सुरक्षा और उनकी देखभाल सुनिश्चित करने के लिए जहाज का प्रबंधन करने वाली कंपनी के संपर्क में हैं।