उज्जैन।(स्वदेश mp न्यूज़… राजेश सिंह भदौरिया बंटी) धार्मिक नगरी उज्जैन में पितरों के प्रति श्रद्धा, सेवा और समर्पण की भावना को साकार करते हुए सामाजिक संस्था ‘तेरा तुझको अर्पण’ द्वारा श्राद्ध पक्ष के दौरान नीलगंगा सरोवर पर निःशुल्क तर्पण का आयोजन किया गया। संस्था के इस सेवा अभियान से 3 हजार से अधिक श्रद्धालु लाभान्वित हुए। संस्था पिछले 10 वर्षों से निरंतर यह सेवा कार्य कर रही है। श्राद्ध पक्ष के 16 दिनों तक प्रतिदिन आयोजित इस कार्यक्रम में उज्जैन सहित आसपास के क्षेत्रों और अन्य स्थानों से आए श्रद्धालुओं ने अपने पूर्वजों के निमित्त श्रद्धापूर्वक तिलांजलि और जलांजलि अर्पित की।
प्रतिदिन सुबह 8 बजे से शुरू होने वाले इस आयोजन में सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए। तर्पण के माध्यम से श्रद्धालुओं ने अपने पितरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए पितृ ऋण से उऋण होने का भावपूर्ण प्रयास किया। सर्व पितृ अमावस्या के अवसर पर विशेष रूप से एक हजार से अधिक लोगों ने तर्पण कर अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की।
विधि-विधान से कराया गया तर्पण
तर्पण के लिए संस्था की ओर से श्रद्धालुओं को आवश्यक पूजन सामग्री निःशुल्क उपलब्ध कराई गई। इसमें तर्पण के लिए सोला, थाली में कुंकू, चंदन, अबीर, हल्दी, चावल, भस्मी, जौ और तिल सहित अन्य पूजन सामग्री रखी जाती थी। इसके साथ दूध, तुलसी पत्र और प्रसाद की व्यवस्था भी की गई थी।
तर्पण के लिए तैयार जल पात्र में दूध, पुष्प, जौ, तिल तथा गंगा, क्षिप्रा, नर्मदा, त्रिवेणी और महाकाल कुंड के जल को मिश्रित किया जाता था। श्रद्धालु हाथ में कुश धारण कर आचार्य के मार्गदर्शन में देवताओं, ऋषियों, मनुष्यों, दिव्य मनुष्यों और अपने पूर्वजों के निमित्त विधि-विधान से तर्पण करते थे।
सेवा और समर्पण की मिसाल बने कार्यकर्ता
आयोजन की विशेषता यह रही कि तर्पण व्यवस्था में केवल संस्था के पदाधिकारी और कार्यकर्ता ही नहीं, बल्कि तर्पण करने आने वाले श्रद्धालुओं ने भी सेवा कार्य में सक्रिय भागीदारी निभाई। श्रद्धालु परिसर में झाड़ू लगाने, पोछा लगाने, जल पात्र भरने, पूजन सामग्री की थालियां तैयार करने, दूध, प्रसाद और पुष्प को अलग-अलग पात्रों में व्यवस्थित करने जैसे कार्यों में सहयोग करते थे। तर्पण के बाद वे अपने पात्रों को धोकर साफ करते और निर्धारित स्थान पर रखते थे।
संस्था के दिलीप शर्मा और मुकेश खंडेलवाल ने बताया कि प्रतिदिन बड़ी संख्या में तर्पणकर्ता पहुंचकर न केवल अपने पितरों के निमित्त तर्पण करते थे, बल्कि व्यवस्थाओं में भी योगदान देते थे। इस प्रकार लगातार 16 दिनों तक सेवा, सहयोग और सामूहिक सहभागिता का क्रम जारी रहा।
50 से अधिक कार्यकर्ताओं ने संभाली व्यवस्था
उज्जैन में आयोजित इस वृहद तर्पण कार्यक्रम का सफल संचालन संस्था के दिलीप शर्मा, मुकेश खंडेलवाल, हरीश शर्मा, प्रकाश परमार, अंगद मीणा, गिरिराज यादव, महेश ठाकुर सहित 50 से अधिक कार्यकर्ताओं ने किया। सभी ने श्रद्धालुओं की सुविधा, पूजन सामग्री की उपलब्धता और तर्पण व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
संस्था की ओर से बताया गया कि नीलगंगा सरोवर स्थित तर्पण स्थल का धार्मिक महत्व भी विशेष है। स्कंद पुराण के अवंति खंड में श्राद्ध और तर्पण के महत्व का उल्लेख मिलता है। संस्था द्वारा पिछले एक दशक से संचालित यह निःशुल्क सेवा अभियान धार्मिक परंपराओं के संरक्षण के साथ ही सेवा, सहयोग और पितरों के प्रति कृतज्ञता की भावना को भी प्रोत्साहित कर रहा है।
प्रतिदिन सुबह 8 बजे से शुरू होने वाले इस आयोजन में सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए। तर्पण के माध्यम से श्रद्धालुओं ने अपने पितरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए पितृ ऋण से उऋण होने का भावपूर्ण प्रयास किया। सर्व पितृ अमावस्या के अवसर पर विशेष रूप से एक हजार से अधिक लोगों ने तर्पण कर अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की।
विधि-विधान से कराया गया तर्पण
तर्पण के लिए संस्था की ओर से श्रद्धालुओं को आवश्यक पूजन सामग्री निःशुल्क उपलब्ध कराई गई। इसमें तर्पण के लिए सोला, थाली में कुंकू, चंदन, अबीर, हल्दी, चावल, भस्मी, जौ और तिल सहित अन्य पूजन सामग्री रखी जाती थी। इसके साथ दूध, तुलसी पत्र और प्रसाद की व्यवस्था भी की गई थी।
तर्पण के लिए तैयार जल पात्र में दूध, पुष्प, जौ, तिल तथा गंगा, क्षिप्रा, नर्मदा, त्रिवेणी और महाकाल कुंड के जल को मिश्रित किया जाता था। श्रद्धालु हाथ में कुश धारण कर आचार्य के मार्गदर्शन में देवताओं, ऋषियों, मनुष्यों, दिव्य मनुष्यों और अपने पूर्वजों के निमित्त विधि-विधान से तर्पण करते थे।
सेवा और समर्पण की मिसाल बने कार्यकर्ता
आयोजन की विशेषता यह रही कि तर्पण व्यवस्था में केवल संस्था के पदाधिकारी और कार्यकर्ता ही नहीं, बल्कि तर्पण करने आने वाले श्रद्धालुओं ने भी सेवा कार्य में सक्रिय भागीदारी निभाई। श्रद्धालु परिसर में झाड़ू लगाने, पोछा लगाने, जल पात्र भरने, पूजन सामग्री की थालियां तैयार करने, दूध, प्रसाद और पुष्प को अलग-अलग पात्रों में व्यवस्थित करने जैसे कार्यों में सहयोग करते थे। तर्पण के बाद वे अपने पात्रों को धोकर साफ करते और निर्धारित स्थान पर रखते थे।
संस्था के दिलीप शर्मा और मुकेश खंडेलवाल ने बताया कि प्रतिदिन बड़ी संख्या में तर्पणकर्ता पहुंचकर न केवल अपने पितरों के निमित्त तर्पण करते थे, बल्कि व्यवस्थाओं में भी योगदान देते थे। इस प्रकार लगातार 16 दिनों तक सेवा, सहयोग और सामूहिक सहभागिता का क्रम जारी रहा।
50 से अधिक कार्यकर्ताओं ने संभाली व्यवस्था
उज्जैन में आयोजित इस वृहद तर्पण कार्यक्रम का सफल संचालन संस्था के दिलीप शर्मा, मुकेश खंडेलवाल, हरीश शर्मा, प्रकाश परमार, अंगद मीणा, गिरिराज यादव, महेश ठाकुर सहित 50 से अधिक कार्यकर्ताओं ने किया। सभी ने श्रद्धालुओं की सुविधा, पूजन सामग्री की उपलब्धता और तर्पण व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
संस्था की ओर से बताया गया कि नीलगंगा सरोवर स्थित तर्पण स्थल का धार्मिक महत्व भी विशेष है। स्कंद पुराण के अवंति खंड में श्राद्ध और तर्पण के महत्व का उल्लेख मिलता है। संस्था द्वारा पिछले एक दशक से संचालित यह निःशुल्क सेवा अभियान धार्मिक परंपराओं के संरक्षण के साथ ही सेवा, सहयोग और पितरों के प्रति कृतज्ञता की भावना को भी प्रोत्साहित कर रहा है।
