उज्जैन।(स्वदेश mp न्यूज़… राजेश सिंह भदौरिया बंटी) विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर की भस्मारती में वीआईपी प्रोटोकॉल परमिशन के नाम पर सामने आई सौदेबाजी को लेकर अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने कड़ी आपत्ति जताई है। महासंघ ने इस धांधली की कड़ी निंदा करते हुए प्रबंध समिति अध्यक्ष व कलेक्टर से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।
अखिल भारतीय पुजारी महासंघ के राष्ट्रीय सचिव रूपेश मेहता ने बताया कि महाकाल मंदिर में वीआईपी प्रोटोकॉल व्यवस्था पूरी तरह हावी हो चुकी है। मंदिर के अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक केवल वीआईपी की आवभगत में लगे रहते हैं। मंदिर समिति द्वारा आम भक्तों के हित में लिए गए निर्णयों का जमीनी स्तर पर कोई लाभ उन्हें नहीं मिल रहा है। मंदिर की सारी सुविधाएं सिर्फ वीआईपी प्रोटोकॉल वालों तक सिमट कर रह गई हैं।
पुजारियों पर सख्ती, वीआईपी प्रोटोकॉल पर आंखें बंद
महासंघ ने आरोप लगाया कि प्रशासक का ध्यान केवल पंडे-पुजारियों के यजमानों और सेवकों पर प्रतिबंध लगाने पर केंद्रित है। वीआईपी प्रोटोकॉल पर उनकी कोई नजर नहीं है, जिसके कारण भस्मारती में व्यापक पैमाने पर धांधली और अव्यवस्था फैल रही है। वीआईपी की सेवा में लगे मंदिर कर्मचारियों की मनमानी भी चरम पर है, जो सिर्फ पुजारियों के सेवकों पर दबाव बनाते देखे जा सकते हैं।
आम श्रद्धालुओं के छिन रहे दर्शन के अधिकार
मेहता ने बताया कि अन्य विभागों के कर्मचारी नंदी हॉल से लेकर चौथे बैरिकेड तक वीआईपी प्रोटोकॉल के लोगों को बैठाते नजर आते हैं, जिन पर मंदिर समिति कोई रोक नहीं लगा पा रही है। इससे आम श्रद्धालुओं के दर्शन का अधिकार छिन रहा है। महासंघ का स्पष्ट कहना है कि मंदिर समिति भ्रष्टाचार रोकने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई है और केवल पंडे-पुजारियों पर दमनकारी नीति अपनाकर वाहवाही लूटने का प्रयास कर रही है।
