उज्जैन।(स्वदेश mp न्यूज़… राजेश सिंह भदौरिया बंटी) सनातन धर्म की रक्षा और अखाड़ों की व्यवस्थाओं में सुधार के लिए अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने अखाड़ों के शुद्धिकरण की मांग उठाई है। महासंघ ने अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महानिर्वाणी प्रमुख रविंद्रपुरी को पत्र लिखकर दागी, अयोग्य और गृहस्थ जीवन जी रहे कथाकथित महामंडलेश्वरों को तुरंत पद से हटाने की मांग की है। साथ ही महामंडलेश्वर बनाने की प्रक्रिया में कड़े संशोधन का भी आग्रह किया है।
समर्थन और योग्यता के आधार पर हो नियुक्ति
महासंघ के राष्ट्रीय सचिव रूपेश मेहता ने बताया कि पत्र के माध्यम से अखाड़ा परिषद की नियमावली में बदलाव की मांग की गई है। इसमें प्रमुख रूप से कहा गया है कि संतों में चादर ओढ़ाने की प्रथा समाप्त की जाए, क्योंकि यह सनातन धर्म की नहीं बल्कि मुस्लिम प्रथा है। महासंघ ने मांग की है कि महामंडलेश्वर उसी संत को बनाया जाए जिसे चारों पीठ के शंकराचार्यों और एक लाख सनातन धर्मावलंबियों का समर्थन प्राप्त हो। संतों में त्याग की प्रवृत्ति होनी चाहिए और उन्हें धन-ऐश्वर्य से दूर रहना चाहिए। महासंघ ने सिंहस्थ पर्व पर होने वाले शाही स्नान को भी सादगीपूर्ण तरीके से संपन्न कराने की मांग रखी है।
प्राचीन परंपराओं का हो पालन
पत्र में अखाड़ों की प्राचीन परंपराओं को लागू करने पर जोर दिया गया है। आद्यशंकराचार्य द्वारा स्थापित व्यवस्था का हवाला देते हुए कहा गया है कि अखाड़ों में बनने वाले साधु ब्रह्मचारी होने चाहिए। भोजन प्रसादी भी ब्रह्मचारी ही बनाएं और अखाड़ों की इस व्यवस्था में स्त्रियों का प्रवेश प्रतिबंधित हो। महासंघ ने अखाड़ा परिषद से यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि देश में एक अखाड़े को कितने महामंडलेश्वर नियुक्त करने का अधिकार है।
बिना मापदंड के बांटे जा रहे पद
महासंघ ने आरोप लगाया है कि पिछले दिनों विवादित अखाड़ा परिषद अध्यक्ष रवींद्रपुरी निरंजनी अखाड़ा द्वारा ऐसे कई लोगों को महामंडलेश्वर बना दिया गया, जिनकी कोई योग्यता या मापदंड नहीं था। ऐसे लोग जिन्होंने न वेद पढ़े, न तीर्थाटन किया और न ही योग-यज्ञ किया, उन्हें पद दे दिया गया। इनमें से कई आपराधिक कार्यों, यौन शोषण और अमानत में खयानत के आरोपी हैं और आज भी अपने बीवी-बच्चों के साथ गृहस्थ जीवन जी रहे हैं।
