उज्जैन।(स्वदेश mp न्यूज़… राजेश सिंह भदौरिया बंटी) विद्यार्थियों में आत्महत्या की घटनाओं को रोकने के लिए उन्हें भयमुक्त, सहयोगात्मक और भेदभाव रहित वातावरण देना परिवार, समाज और शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी है। हर संघर्ष का समाधान संवाद, सहयोग तथा कानूनी समर्थन के माध्यम से संभव है। यह बात सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के कुलगुरु आचार्य अर्पण भारद्वाज ने कही। वे विश्वविद्यालय के स्वर्ण जयंती सभागार में आत्महत्या रोकथाम विषय पर आयोजित संभाग स्तरीय एक दिवसीय संवेदनशीलता कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे थे।
कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय की समाजशास्त्र एवं समाज कार्य अध्ययनशाला तथा उच्च शिक्षा विभाग के क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक कार्यालय के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
मुख्य वक्ता जिला रजिस्ट्रार अनुराग शर्मा ने कहा कि मेडिकल, प्रबंधन और इंजीनियरिंग जैसे परिसरों की परिस्थितियां और समस्याएं अलग होती हैं। कार्य का दबाव और रैगिंग विद्यार्थियों को मानसिक तनाव की ओर ले जाते हैं। इसका समाधान विद्यार्थियों, शिक्षकों और प्रबंधन के आपसी सामंजस्य से ही संभव है। मुख्य अतिथि एवं परिषद सदस्य राजेश कुशवाहा ने कहा कि विद्यार्थियों के साथ मित्रवत व्यवहार और उनकी योजनाओं में सहभागिता से विश्वविद्यालय का वातावरण स्वस्थ और सकारात्मक बनता है।
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अंकुर गुप्ता ने मानसिक तनाव और अवसाद के लक्षणों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अवसाद के प्रारंभिक संकेतों को पहचान कर समय रहते मदद की जा सकती है। डॉ. गुप्ता ने रैगिंग को मानसिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बताते हुए कहा कि सीनियर विद्यार्थियों द्वारा डाला जाने वाला दबाव जूनियर्स को अवसाद की ओर ले जाता है।
कार्य परिषद सदस्य एवं शिक्षाविद् डॉ. वरुण गुप्ता ने सकारात्मक एवं प्रेरणादायी वातावरण के निर्माण में शिक्षकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। वहीं, कार्य परिषद सदस्य एवं शिक्षाविद् संजय वर्मा ने जीवन को अनमोल बताते हुए इसे आशा, धैर्य और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ जीने की बात कही।
कार्यक्रम में क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा विभाग डॉ. अनीजबाल और उच्च शिक्षा विभाग के ओएसडी डॉ. विकास टकले विशेष रूप से उपस्थित रहे। इस दौरान संभाग के शासकीय एवं अशासकीय महाविद्यालयों के प्राचार्यों और शिक्षकों ने सहभागिता कर शैक्षणिक वातावरण को भयमुक्त व सहयोगपूर्ण बनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. कविता जैन ने किया तथा आभार समाजशास्त्र एवं समाज कार्य अध्ययनशाला की अध्यक्ष डॉ. ज्योति उपाध्याय ने माना।
