मुख्यमंत्री मोहन यादव दंदरौआ हनुमान मंदिर में दर्शन-पूजन के बाद ग्वालियर रवाना होने वाले थे। उनके साथ प्रभारी मंत्री प्रहलाद पटेल, मंत्री राकेश शुक्ला और भाजपा जिला अध्यक्ष देवेंद्र नरवरिया भी हेलीकॉप्टर में सवार हो चुके थे। इसी दौरान हेलीपैड के ऊपर एक ड्रोन उड़ता दिखाई दिया। सुरक्षा एजेंसियों ने तत्काल स्थिति का संज्ञान लिया और पायलट ने सुरक्षा कारणों से उड़ान भरने से इनकार कर दिया।
जानकारी मिलती ही मच गया हड़कंप
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, स्पेशल सिक्योरिटी टीम और अन्य सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हो गईं। पूरे इलाके की घेराबंदी कर ड्रोन संचालक की तलाश शुरू की गई। कुछ ही देर बाद मंदिर परिसर की छत से एक युवक को हिरासत में लिया गया और उसका ड्रोन जब्त कर लिया गया।
शुरुआती जांच में क्या सामने आया?
पूछताछ में युवक की पहचान राघवेंद्र खेमरिया के रूप में हुई। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि वह दंदरौआ धाम के सोशल मीडिया से जुड़े कार्य करता है और कार्यक्रम की वीडियो रिकॉर्डिंग के उद्देश्य से ड्रोन उड़ा रहा था। हालांकि, उसने वीवीआईपी मूवमेंट और हेलीपैड के नो-फ्लाई जोन में बिना प्रशासनिक अनुमति ड्रोन उड़ाकर सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया। करीब 10 मिनट तक सुरक्षा जांच और सत्यापन के बाद एजेंसियों ने हेलीपैड को पूरी तरह सुरक्षित घोषित किया। इसके बाद मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर ग्वालियर के लिए रवाना हुआ।
सुरक्षा एजेंसियां मामले की जांच में जुटी
फिलहाल मेहगांव थाना पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले की जांच कर रही हैं। यह पता लगाया जा रहा है कि मामला केवल लापरवाही का था या सुरक्षा व्यवस्था में कोई गंभीर चूक हुई। घटना ने वीवीआईपी सुरक्षा व्यवस्था और ड्रोन संचालन के नियमों के पालन को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान हुई इस घटना ने प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता की परीक्षा ले ली। साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया कि वीवीआईपी कार्यक्रमों के दौरान नो-फ्लाई जोन के नियमों का सख्ती से पालन कराना बेहद आवश्यक है।
