उज्जैन।(स्वदेश mp न्यूज़… राजेश सिंह भदौरिया बंटी) लक्ष्मी नगर और सेठी नगर स्थित शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में पर्युषण दशलक्षण महापर्व का भव्य आयोजन 16 से 25 सितंबर तक किया जाएगा। यह 10 दिवसीय आयोजन मुनि प्रणीत सागर और क्षुल्लक विधेय सागर ससंघ के सानिध्य में होगा। इसमें गणाचार्य विराग सागर और पट्टाचार्य विशुद्ध सागर का शुभाशीष प्राप्त है। शांतिनाथ ट्रस्ट मंडल, चातुर्मास समिति 2026, शांतिनाथ महिला मंडल एवं सकल दिगंबर जैन समाज के तत्वावधान में यह कार्यक्रम होगा।
ट्रस्ट सचिव सुशील लुहाड़िया व समाज सचिव सचिन कासलीवाल ने बताया कि मुनि प्रणीत सागर का वर्तमान चातुर्मास यहीं हो रहा है। मुनि ने संदेश दिया कि पर्युषण पर्व अपने ज्ञात-अज्ञात दोषों की आलोचना करने का अद्भुत अवसर है, इसलिए इस आत्मशुद्धि के महायज्ञ में अवश्य शामिल हों।
दिनभर रहेगी धर्ममय दिनचर्या
कार्यक्रम के तहत रोजाना सुबह 5.30 बजे से सामायिक, प्रतिक्रमण, भगवान का अभिषेक, शांतिधारा, नित्य-नियम व दशलक्षण धर्म की पूजा होगी। सुबह 8.30 बजे से 250 विद्यार्थियों द्वारा तत्त्वार्थ सूत्र वाचन, विशेष प्रवचन, तत्त्व-चर्चा व आहारचर्या संपन्न होगी। दोपहर 1.30 से 4 बजे तक 10 महाविधान व 1008 अर्घ्यावली तथा शाम 6.30 से 7.15 बजे तक 22 परिषह ध्यान व श्रावक प्रतिक्रमण होगा। शाम को भव्य आरती, भक्तामर दीपार्चना, शास्त्र सभा और मुनि के मंगल प्रवचन होंगे।
बुधवार को उत्तम क्षमा धर्म की आराधना
पर्व के पहले दिन बुधवार 16 सितंबर को उत्तम क्षमा धर्म की आराधना की जाएगी। मुनि ने बताया कि क्षमा वीरों का आभूषण है। आज व्यक्ति छोटी-छोटी बातों पर क्रोधित हो जाता है। उत्तम क्षमा सिखाती है कि दूसरों की गलती भूलकर और अपनी गलती के लिए क्षमा मांगकर मन को पवित्र किया जाए।
10 दिन 10 धर्म, विधान व 22 परिषह ध्यान का क्रम
दशलक्षण पर्व के दौरान प्रतिदिन विभिन्न धर्मों की आराधना, विधान और ध्यान होंगे। इसके तहत 16 सितंबर को उत्तम क्षमा धर्म, जिन चतुर्विंशतिका विधान, 26 इलायची से अर्घ्य व क्षुधा-पिपासा परिषह ध्यान होगा। 17 सितंबर को उत्तम मार्दव धर्म, एकीभाव विधान, 25 बादाम से अर्घ्य व शीत-उष्ण परिषह ध्यान, 18 को उत्तम आर्जव धर्म, विषापहार विधान, 40 लवंग से अर्घ्य व दंशमशक-नग्नता परिषह ध्यान, 19 को उत्तम शौच धर्म, तत्त्वार्थ सूत्र विधान, 357 चारोली से अर्घ्य व अरति-स्त्री परिषह ध्यान, 20 को उत्तम सत्य धर्म, निर्वाण क्षेत्र विधान, 46 काजू से अर्घ्य व चर्या-निषद्या परिषह ध्यान, 21 को उत्तम संयम धर्म, रत्नत्रय विधान, 23 धूप से अर्घ्य व शय्या-आक्रोश परिषह ध्यान, 22 को उत्तम तप धर्म, विशुद्ध सागर विधान, 72 अक्षत से अर्घ्य व वध-याचना परिषह ध्यान, 23 को उत्तम त्याग धर्म, गुण संपत्ति विधान, 63 मणि-रत्न से अर्घ्य व अलाभ-रोग-तृण स्पर्श परिषह ध्यान, 24 को उत्तम आकिंचन्य धर्म, रत्नत्रय विधान, 248 पुष्प से अर्घ्य व मल-सत्कार पुरस्कार परिषह ध्यान और 25 सितंबर को उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म, अंगारी गुण विधान, 108 श्रीफल से अर्घ्य व प्रज्ञा-अज्ञान-अदर्शन परिषह ध्यान संपन्न होगा।
विधान विनायक पुण्यार्जक परिवार
आयोजन में पुण्यार्जक के रूप में जितेंद्र बोनी-रानू जैन, संजय-सारिका लुहाड़िया, देवेंद्र-सपना सिंघई, शशि जैन, लोकेश-निलज छाबड़ा, राकेश-मुदुला जैन, भक्तामर महिला मंडल, वीरबाला कासलीवाल, सुशील-नीलम लुहाड़िया, मुकेश-ज्योति जैन, हीरालाल-सुधा बिलाला, शिल्पा-आशीष सोनी, बृजकिशोर-मनोज जैन, धर्मेंद्र-त्रिशला मलैया और ममता-सुबोध जैन परिवार शामिल होंगे।
इन्होंने किया उपस्थिति का आग्रह
आयोजन के लिए मंदिर को आकर्षक विद्युत सज्जा से सजाया गया है। कार्यक्रमों में चातुर्मास समिति अध्यक्ष विजेंद्र जैन सुपारी वाला, सुनील जैन ट्रांसपोर्ट, देवेंद्र सिंघई, संयोजक मनोज जैन वकील साहब, सह संयोजक अशोक जैन, लोकेश छाबड़ा, कोषाध्यक्ष धवल जैन, ट्रस्ट अध्यक्ष डॉ. पीसी जैन, सचिव सुशील लुहाड़िया, सुरेश कासलीवाल, सुबोध-ममता जैन और प्रदीप पांड्या सहित शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर ट्रस्ट, संपूर्ण चातुर्मास समिति, सकल दिगंबर जैन समाज, महिला मंडल व युवा मंडल ने समाजजनों से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने का आग्रह किया है।
