विहिप के अनुषांगिक संगठनों ने गुरु पूर्णिमा पर संत गुरु सम्मान कर दिया एकता का संदेश
उज्जैन।(स्वदेश mp न्यूज़… राजेश सिंह भदौरिया बंटी) विश्व हिंदू परिषद के आयाम दुर्गा वाहिनी और मातृशक्ति ने महानगर में गुरु पूर्णिमा उत्सव मनाया। इस अवसर पर संगठन की सदस्यों ने गुरु-शिष्य परंपरा के तहत संत गुरु सम्मान कार्यक्रम आयोजित कर संतों का पूजन किया और आशीर्वाद प्राप्त कर एकता का संदेश दिया।
दुर्गा वाहिनी की जिला संयोजिका प्रियंका सिंह परमार के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि मातृशक्ति की विभाग संयोजिका लता चौहान ने गुरुजी को तिलक लगाकर व भेंट देकर सम्मानित किया। जिला संयोजिका प्रियंका सिंह ने भी श्रीफल भेंट कर अभिनंदन किया। इसके बाद दुर्गा वाहिनी की सदस्यों ने पारंपरिक विधि-विधान से गुरुजी का पूजन किया। उन्हें पुष्पमाला पहनाकर व श्रीफल भेंट कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया गया।
इस अवसर पर मुख्य रूप से प्रखंड संयोजिका अनुष्का चौरसिया, सह संयोजिका चंदा माली, प्रखंड शक्ति साधन प्रमुख आनंदी राठौर, संगीत राठौर और शक्ति साधन की प्रखंड संयोजिका पारो दीदी सहित दुर्गा वाहिनी की कई सदस्य उपस्थित थीं।

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अज्ञानी धर्मगुरुओं के कारण बदनाम हो रहा सनातन धर्म, विवेक से चुनें गुरु
आश्रम चाणक्य में देशभर से आए शिष्यों ने धूमधाम से मनाया गुरु पूर्णिमा महोत्सव
उज्जैन। महाकाल घाटी स्थित आश्रम चाणक्य में गुरु पूर्णिमा महोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, झारखंड और कोलकाता सहित देश के विभिन्न हिस्सों से आए सैकड़ों शिष्यों ने महेश पुजारी का पूजन कर आशीर्वाद लिया।
रूपेश मेहता ने बताया कि महोत्सव में शिष्यों का मार्गदर्शन करते हुए महेश पुजारी ने कहा कि वर्तमान में सनातन धर्म में धर्मगुरुओं की बाढ़ आ गई है। कई लोग अज्ञानतावश अपने उद्धार के लिए ऐसे लोगों को गुरु बना रहे हैं, जिन्हें सनातन धर्म की परंपरा, मर्यादा और व्यवस्था का ज्ञान नहीं है। ऐसे धर्मगुरुओं के कारण ही आज सनातन धर्म बदनाम हो रहा है। उन्होंने आह्वान किया कि गुरु हमेशा जानकार को ही बनाना चाहिए। किसी को भी गुरु बनाने से पहले उसके गुण-दोषों को परखें और पूर्ण सोच-समझकर व अपने विवेक का उपयोग करके ही गुरु का चुनाव करें।
आयोजन में इनकी रही उपस्थिति
महोत्सव में विजय पुजारी, मधुसूदन शर्मा, आशीष अग्निहोत्री, राकेश जोशी उर्फ राका गुरुजी, हितेश जरीवाला, रूपा गांगुली, गोपाल पुजारी, सुरेश शर्मा, अशोक शुक्ला, राजेश बैरागी, मुकेश खंडेलवाल, कप्तान बोबल, सुभाष यादव, जयकिशन, राहुल शर्मा, नेमीचंद परिहार, आशीष ठक्कर, किशन पांडे, राम शर्मा और गोविंद व्यास उपस्थित थे। इसके साथ ही अखिल भारतीय पुजारी महासंघ, अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज और महाकाल सेना के सभी पदाधिकारी व सदस्य भी आयोजन में शामिल हुए।

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गुरु पूर्णिमा पर 63 परिवारों ने किया मातृ-पितृ चरण पूजन, भावुक हुए लोग
तेरा तुझको अर्पण सेवा संस्थान का आयोजन, सह प्रांत प्रचारक ने मातृ-पितृ सेवा को बताया सर्वोच्च धर्म
उज्जैन। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर सामाजिक संस्था ‘तेरा तुझको अर्पण सेवा संस्थान’ द्वारा मातृ-पितृ चरण पूजन, नेत्र वंदन और आशीर्वाद समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में 63 से अधिक परिवारों ने विधि-विधान से अपने माता-पिता के चरण पखारकर पूजन किया। इस भावपूर्ण आयोजन में एक हजार से अधिक नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह प्रांत प्रचारक केतन भाईसाहब, विभाग कार्यवाह मनीष गोयल और वरिष्ठ समाजसेवी मुकेश रांका ने देवगुरु बृहस्पति व श्रवण कुमार के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन कर किया। संस्था अध्यक्ष और कार्यक्रम के संयोजक धनंजय शर्मा ने अतिथियों का स्वागत करते हुए मातृ-पितृ सेवा को जीवन का सर्वोच्च धर्म बताया।
जल और दूध से पखारे चरण, नेत्र वंदन रहा आकर्षण
पूजन के दौरान परिजनों ने माता-पिता के चरण जल और दूध से पखारे। इसके बाद इत्र, कुमकुम, हल्दी, चंदन, अक्षत और पुष्प अर्पित किए गए। माता-पिता के मस्तक पर तिलक लगाकर उन्हें पगड़ी, दुपट्टा और पुष्पमाला पहनाकर सम्मानित किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता ‘नेत्र वंदन’ रही। इसमें माता-पिता और संतानों ने एक-दूसरे की आंखों में देखकर प्रेम, श्रद्धा और करुणा का भाव व्यक्त किया। देशभक्ति और संस्कारों से ओतप्रोत गीतों के बीच कई माता-पिता की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े। अंत में आरती कर आशीर्वाद लिया गया।
संस्कारों का संचार जरूरी
मुख्य अतिथि केतन भाईसाहब ने अपने उद्बोधन में कहा कि मातृ-पितृ सेवा भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी पहचान है। प्रत्येक परिवार को इस परंपरा को अपनाकर नई पीढ़ी में संस्कारों का संचार करना चाहिए। उन्होंने संस्था के इस प्रयास की सराहना करते हुए इसे घर-घर तक पहुंचाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का संचालन शैलेन्द्र व्यास एवं स्वामी मुस्कुराके ने किया। अंत में आभार समाजसेवी मुकेश खंडेलवाल ने माना।

