विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने इस बयान को “इतिहास और राष्ट्रीय भावनाओं का अपमान” बताते हुए कहा कि यह दृष्टिकोण महमूद गजनी जैसे उग्र आक्रमणकारियों के कृत्यों का महिमामंडन करता प्रतीत होता है। उन्होंने सवाल उठाया कि जिन्होंने सोमनाथ मंदिर लूटा, नालंदा विश्वविद्यालय पर हमला किया और भारतीय संस्कृति को क्षति पहुँचाई, उन्हें “स्वदेशी” कहने का क्या औचित्य है।बंसल ने यह भी आरोप लगाया कि अंसारी के बयान से राजनीतिक पक्षपात और इतिहास को तोड़‑मरोड़ कर पेश करने का प्रयास दिखता है। उन्होंने कहा कि पूर्व उपराष्ट्रपति पहले भी विवादित बयानों में सुर्खियों में रहे हैं और इस बयान से हिंदू समुदाय की भावनाएँ आहत हुई हैं।
विश्व हिंदू परिषद ने जोर दिया कि इतिहास को वैज्ञानिक और प्रमाणित आधार पर ही समझा जाना चाहिए, न कि भावनात्मक या विवादित भाषा में प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे बयान सामाजिक ध्रुवीकरण और राजनीतिक तनाव बढ़ा सकते हैं।
इस बीच कांग्रेस ने अंसारी के बयान को सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संदर्भ में देखने की कोशिश की है, जबकि भाजपा और विश्व हिंदू परिषद इसे इतिहास का अपमान और राष्ट्रवाद के खिलाफ बयान बता रहे हैं। यह विवाद राष्ट्रीय राजनीति में इतिहास, राष्ट्रीय पहचान और सामाजिक भावना जैसे मुद्दों पर बहस को और गहरा कर रहा है।
