दीपक शर्मा ने सबसे पहले 9 मई को जम्मू क्राइम ब्रांच के आईजी और एसएसपी, आर्थिक अपराध शाखा को शिकायत दी थी। कोर्ट के सामने एसएसपी क्राइम ब्रांच, ईओडब्ल्यू जम्मू की रिपोर्ट रखी गई। रिपोर्ट के मुताबिक क्राइम ब्रांच को शिकायत 11 मई को मिली थी। 20 मई को इसे आगे की कार्रवाई के लिए क्राइम हेडक्वार्टर भेजा गया। 9 जून को क्राइम हेडक्वार्टर ने इसे जोनल पुलिस हेडक्वार्टर जम्मू को भेजने की मंजूरी दी। 13 जून को यह मामला आईजी जम्मू जोन को भेजा गया। इसके बाद जांच के लिए इसे एसएसपी रियासी को सौंपा गया और आखिर में भवन, कटरा के डीएसपी को जांच का जिम्मा दिया गया। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि अभी तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। मामला जांच के स्तर पर ही है।
29 जुलाई की सुनवाई के दौरान वकील दीपक शर्मा ने कोर्ट से मांग की कि इस मामले से जुड़े सभी सबूतों को फौरन सुरक्षित किया जाए। उन्होंने कहा कि बची हुई चांदी या चांदी जैसी दिखने वाली वस्तुएं, उनके सैंपल, बचे हुए टुकड़े, स्टॉक और वॉल्ट के रिकॉर्ड, वजन और भेजने के रजिस्टर, लैब और असे की रिपोर्ट, सरकारी टकसाल के कागज और चेन ऑफ कस्टडी से जुड़े सभी दस्तावेज सुरक्षित रखे जाएं, साथ ही सीसीटीवी फुटेज, इलेक्ट्रॉनिक इन्वेंट्री डेटा, ऑफिशियल ईमेल, सर्वर लॉग, ऑडिट ट्रेल, अकाउंटिंग रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल सबूतों को भी डिलीट या बदला न जाए।
अर्जी में कहा गया कि अगर चांदी को अभी पिघलाया, रिफाइन किया या इधर-उधर किया गया या कंप्यूटर डेटा डिलीट हो गया तो सबूतों की पहचान, वजन और शुद्धता हमेशा के लिए खराब हो जाएगी। इन दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने डीएसपी भवन, कटरा को निर्देश दिया कि वे सबूत सुरक्षित रखने के लिए तुरंत कदम उठाएं और चल रही जांच की विस्तृत रिपोर्ट अगली तारीख पर पेश करें। वकील दीपक शर्मा ने कहा कि कोर्ट के इस आदेश से अब जांच और जरूरी सबूतों की सुरक्षा दोनों सीधे कोर्ट की निगरानी में आ गए हैं। उन्होंने कहा, “मेरी सबसे बड़ी चिंता यही है कि कोई भी भौतिक, कागजी या डिजिटल सबूत बदला, ट्रांसफर, नष्ट या डिलीट न हो जाए। श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा यह मामला है और इसमें सच्चाई सामने आनी चाहिए।”
