श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर के निर्माण को लेकर गतिविधियां तेज,  मथुरा पहुंची गुलाबी पत्थरों की पहली खेप

नई दिल्ली ।(स्वदेश mp न्यूज़… राजेश सिंह भदौरिया बंटी) मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर निर्माण को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। राधाकुंड क्षेत्र के जुल्हैंदी स्थित चित्रगुप्त पीठ में शुक्रवार देर रात भरतपुर के बंसीपहाड़पुर से मंगाए गए गुलाबी पत्थरों की पहली खेप पहुंच गई। इन पत्थरों को श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर निर्माण की प्रस्तावित योजना से जोड़ा जा रहा है। चित्रगुप्त पीठाधीश्वर स्वामी सच्चिदानंद महाराज  ने 9 अगस्त से अपने आश्रम से विधिवत कारसेवा शुरू करने और पत्थरों को तराशने का काम शुरू करने की घोषणा की है। इसके लिए आयोजित कार्यक्रम में 13 अखाड़ों के साधु-संतों को आमंत्रित किया गया है।

स्वामी सच्चिदानंद महाराज के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण के उद्देश्य से करीब पांच हजार मीट्रिक टन गुलाबी पत्थरों का ऑर्डर दिया गया है। इसी ऑर्डर की पहली खेप शुक्रवार रात मथुरा पहुंची। ये पत्थर भरतपुर के बंसीपहाड़पुर क्षेत्र से मंगाए गए हैं। बंसीपहाड़पुर के गुलाबी पत्थरों का इस्तेमाल अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर के निर्माण में भी किया गया है। ऐसे में मथुरा में इन पत्थरों की पहली खेप पहुंचने के बाद श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े अभियान को लेकर हलचल बढ़ गई है।

9 अगस्त को चित्रगुप्त पीठ में प्रस्तावित कार्यक्रम को कारसेवा के औपचारिक शंखनाद के तौर पर देखा जा रहा है। इस दौरान बड़ी संख्या में साधु-संतों के शामिल होने की संभावना है। स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने पहले ही घोषणा की थी कि इसी दिन उनके आश्रम से कारसेवा शुरू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। साथ ही मंदिर निर्माण के लिए लाए गए पत्थरों को तराशने का काम भी शुरू करने की बात कही गई है। उनका कहना है कि श्रीकृष्ण की जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण के उद्देश्य से यह अभियान आगे बढ़ाया जाएगा।

इस अभियान की शुरुआत की घोषणा जुलाई में की गई थी। स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने 4 जुलाई को अयोध्या आंदोलन की तर्ज पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति के लिए कारसेवा का एलान किया था। इसके बाद 12 जुलाई को उन्होंने हरिद्वार स्थित वात्सल्य गंगा आश्रम में साध्वी ऋतंभरा से मुलाकात कर अभियान के लिए समर्थन मांगा था। इसके अलावा अखाड़ा परिषद से जुड़े संतों और अन्य धार्मिक संतों की ओर से भी इस पहल को समर्थन मिलने की बात सामने आई है।

मथुरा में पत्थरों की खेप पहुंचने के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी पूरे घटनाक्रम पर नजर रखी जा रही है। अधिकारियों ने इस मामले को लेकर स्वामी सच्चिदानंद महाराज से कई बार मुलाकात कर बातचीत की थी। महाराज ने पहले कहा था कि 9 अगस्त को ही यह तय होगा कि आगे की कार्रवाई किस रूप में होगी। हालांकि पत्थरों की पहली खेप पहुंचने और उन्हें तराशने का काम शुरू करने की घोषणा के बाद उनका रुख स्पष्ट माना जा रहा है।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़ा मामला लंबे समय से धार्मिक और कानूनी बहस का विषय रहा है। ऐसे में कारसेवा की घोषणा और मंदिर निर्माण के लिए पत्थरों का मथुरा पहुंचना महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। अब 9 अगस्त को होने वाले कार्यक्रम पर नजर रहेगी, जब विभिन्न अखाड़ों के साधु-संतों की मौजूदगी में कारसेवा की औपचारिक शुरुआत और पत्थरों को तराशने के काम को लेकर अगला कदम उठाया जाएगा।