खाटू श्याम स्वरूप में हुए शनिदेव के दर्शन, जन्मोत्सव पर उमड़ा आस्था का जनसैलाब, ढोल-नगाड़ों व जयकारों से गूंजा परिसर

उज्जैन।(स्वदेश mp न्यूज़… राजेश सिंह भदौरिया बंटी) हरसिद्धि चौराहे स्थित अति प्राचीन श्री सूर्यपुत्र शनिदेव भगवान मंदिर में शनि जन्मोत्सव अपार श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर भगवान शनिदेव का आकर्षक शृंगार किया गया और उन्होंने भक्तों को खाटू श्याम स्वरूप में दर्शन दिए। जन्मोत्सव पर आयोजित महाआरती, छप्पन भोग और 21वें विशाल भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने पहुंचकर दर्शन एवं प्रसादी का लाभ लिया। ढोल-नगाड़ों की थाप और मंत्रोच्चार के बीच पूरा मंदिर परिसर ‘जय शनिदेव महाराज’, ‘खाटू श्याम बाबा की जय’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से गूंज उठा।
विशेष फलाहारी केक और छप्पन भोग का लगा भोग
मुख्य पुजारी ज्योतिषाचार्य पंडित कैलाशचंद जोशी तथा दिनेश जोशी, कृष्णकांत जोशी, राज जोशी और निहाल जोशी के नेतृत्व में यह भव्य आयोजन संपन्न हुआ। भगवान के जन्मोत्सव पर राजू नगर परिवार द्वारा विशेष फलाहारी केक और छप्पन भोग अर्पित किया गया। वहीं, विशाल भंडारे में नीलू वर्मा और जीनवाल परिवार ने भी पूरे उत्साह के साथ अपनी सहभागिता निभाई। मंदिर से जुड़े सभी भक्तों ने आयोजन में तन-मन-धन से सहयोग दिया।
गणमान्य नागरिक और जनप्रतिनिधि हुए शामिल
इस धार्मिक आयोजन में संयुक्त ब्राह्मण सामाजिक कल्याण समिति की राष्ट्रीय अध्यक्ष रेखा भार्गव, अजय शंकर तिवारी, जिलाध्यक्ष आभास शर्मा व उनकी टीम विशेष रूप से उपस्थित रही। साथ ही विश्व हिंदू परिषद व बजरंग दल से दर्शन परमार, केशव प्रखंड के अमन और उनकी टीम ने भी सहभागिता की। महाआरती में ज्योतिषाचार्य श्रवण अग्निहोत्री, मुकेश गुप्ता और शशांक ने भी प्रभु आराधना की। इसके अलावा पार्षद गब्बर भाटी, अशोक कायत, धन सिंह और बाबूलाल डाबी सहित अनेक गणमान्य नागरिकों ने दर्शन लाभ लिया।
देर रात तक चला भजन और प्रसादी का दौर
कार्यक्रम में महाआरती का सुव्यवस्थित प्रबंधन पंडित शुभम पंचोली द्वारा किया गया। इस अवसर पर पत्रकार कमल चौहान, रवि चंद्रवंशी, अशोक मालवी, धर्मेंद्र राठौर, मनोज उपाध्याय, शुभम परमार, कपिल तिवारी, लखन यादव, विमल बैंडवाल, पप्पू और रवि सहित अनेक मीडियाकर्मी उपस्थित रहे। श्रद्धालुओं ने व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए इसे अब तक का सबसे भव्य आयोजन बताया। मंदिर में देर रात तक भजन, आरती और प्रसादी वितरण का सिलसिला चलता रहा।

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