उज्जैन।(स्वदेश mp न्यूज़… राजेश सिंह भदौरिया बंटी) दुर्घटना, बीमारी या जन्मजात कारणों से अपने अंग खो चुके 18 दिव्यांगों को जब कृत्रिम अंग लगे, तो उनके चेहरों पर नई उम्मीद और मुस्कान लौट आई। यह पुनीत कार्य देवास रोड स्थित श्री राजेंद्र जैन शोध संस्थान में चल रहे पांच दिवसीय निःशुल्क कृत्रिम अंग प्रत्यारोपण शिविर के पहले दिन हुआ।
‘दिव्यांगता मुक्त भारत’ अभियान के तहत जैन इंजीनियर्स सोसायटी उज्जैन चैप्टर की मेजबानी में 1 से 5 मई तक यह शिविर आयोजित किया जा रहा है। इसमें प्रतिदिन 20 से 25 दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग लगाकर उन्हें सामान्य जीवन की ओर लौटने का अवसर प्रदान किया जा रहा है।
इस सेवा कार्य में परमार्थ निकेतन ऋषिकेश और देशभर में 35 वर्षों से सक्रिय महावीर सेवा सदन कोलकाता की विशेषज्ञ टीम अपनी सेवाएं दे रही है। जैन इंजीनियर्स सोसायटी के संरक्षक इंजी. अभय कुमार सेठिया व उनके परिवार की प्रेरणा से यह आयोजन संभव हो सका है। इसमें लायंस क्लब उज्जैनी का भी विशेष सहयोग रहा है। आगामी दिनों में अन्य संस्थाएं भी अपनी भागीदारी निभाएंगी।
जयपुर फुट तकनीक से तैयार हो रहे अंग
विशेषज्ञों की टीम मरीजों की स्थिति का विस्तृत आकलन कर उनके अनुकूल कृत्रिम अंग का डिजाइन तैयार कर रही है। इसके बाद माप लेकर हाई डेंसिटी पॉलिथीन और जयपुर फुट तकनीक के माध्यम से अंग बनाए जा रहे हैं, ताकि मरीज को प्राकृतिक अंगों जैसा अनुभव मिल सके। आयोजकों ने बताया कि शिविर में कुल 125 दिव्यांगों को कृत्रिम हाथ, पैर और कैलिपर निःशुल्क लगाने का लक्ष्य है। शिविर पूर्णतः निःशुल्क है और लाभार्थियों के लिए भोजन सहित अन्य सुविधाएं भी जुटाई गई हैं। जरूरतमंद व्यक्ति अपना पहचान पत्र लाकर पंजीयन करा सकते हैं।
