सरकार के इस कदम से साफ संकेत मिल रहे हैं कि भारत अब विदेशी कच्चे तेल पर अपनी निर्भरता कम करना चाहता है. हाल के समय में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव के कारण ऊर्जा सुरक्षा बड़ी चिंता बन गई है. इसी को देखते हुए सरकार लंबे समय की योजना पर काम कर रही है.
18 मई को जारी एक अधिसूचना में Bureau of Indian Standards ने नए फ्यूल ब्लेंड के लिए मानक जारी किए हैं. ये नए नियम 15 मई 2026 से लागू हो चुके हैं. अभी देशभर में E20 फ्यूल को लागू किया जा रहा है, जिसमें पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाया जाता है. सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब अमेरिका-ईरान युद्ध की वजह से महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज स्टेट बंद है. यही वजह है कि दुनिया में कच्चे तेल की सप्लाई पर दबाव बना हुआ है.
नए नियमों में क्या होगा खास?
नए BIS मानकों में ऐसे इंजन और वाहनों के लिए तकनीकी नियम तय किए गए हैं, जो ज्यादा एथेनॉल वाले पेट्रोल पर चलेंगे. इसमें फ्यूल की गुणवत्ता, ऑक्टेन स्तर, सल्फर सीमा, पानी की मात्रा, वाष्प दबाव, जंग से सुरक्षा और फ्यूल स्थिरता जैसी बातोंं पर जोर दिया है. इन नियमों का मकसद यह तय करना है कि भविष्य में आने वाली फ्लेक्स-फ्यूल और ज्यादा एथेनॉल सपोर्ट करने वाली गाड़ियां सुरक्षित और बेहतर तरीके से काम करें.
एथेनॉल उद्योग ने किया स्वागत
एथेनॉल उद्योग से जुड़े संगठनों ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है. उनका मानना है कि इससे अतिरिक्त एथेनॉल उत्पादन का इस्तेमाल हो सकेगा और देश में साफ-सुथरी मोबिलिटी को बढ़ावा मिलेगा. उद्योग के आंकड़ों के अनुसार भारत की एथेनॉल उत्पादन क्षमता लगभग 2 अरब लीटर तक पहुंच चुकी है, लेकिन तेल कंपनियों की ओर से अभी तक इसकी खरीद करीब 1 अरब लीटर तक ही सीमित रही है.
