रेलवे द्वारा जारी टेंडर कुल्थाना से राजपुरा के बीच करीब 13 किलोमीटर लंबे सेक्शन के लिए है। इस हिस्से में नई ब्रॉडगेज लाइन बिछाने के साथ स्टेशन भवन, सात सुरंगें, सात बड़े पुल, तीन मेगा ब्रिज और अन्य रेल संरचनाओं का निर्माण किया जाएगा। यह पूरा सेक्शन पहाड़ी और वन क्षेत्र से होकर गुजरता है, इसलिए इसे परियोजना का सबसे चुनौतीपूर्ण भाग माना जाता है। करीब दो दशक पहले शुरू हुई इंदौर-खंडवा रेल लाइन परियोजना पश्चिम रेलवे की सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल है। इसके पूरा होने पर इंदौर से खंडवा के बीच सीधा ब्रॉडगेज रेल संपर्क स्थापित होगा। साथ ही मुंबई जाने वाले यात्रियों के लिए रेल मार्ग छोटा होगा और मालवा-निमाड़ के बीच व्यापार, उद्योग तथा पर्यटन को भी नई गति मिलेगी। क्षेत्र के लोग वर्षों से इस परियोजना के पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन समयसीमा लगातार आगे बढऩे से उनकी उम्मीदों को बार-बार झटका लग रहा है।
बार-बार बढ़ती रही प्रोजेक्ट की समयसीमा
महू-खंडवा गेज परिवर्तन परियोजना की घोषणा के बाद लोगों को उम्मीद थी कि रेल लाइन कुछ वर्षों में शुरू हो जाएगी, लेकिन निर्माण कार्य तय गति से आगे नहीं बढ़ पाया। कई बार नई समयसीमा घोषित हुई, मगर परियोजना अब भी अधूरी है। नए टेंडर के बाद अब 2030 तक इसके पूरा होने की उम्मीद जताई जा रही है।
क्षेत्र की अर्थव्यवस्था के लिए अहम परियोजना
इंदौर-खंडवा रेल लाइन शुरू होने से मालवा और निमाड़ के बीच रेल संपर्क मजबूत होगा। इंदौर से खंडवा और आगे मुंबई की यात्रा अधिक सुगम बनेगी। कृषि उपज, औद्योगिक सामान और अन्य माल परिवहन की लागत व समय कम होने के साथ पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। यही कारण है कि इस परियोजना को पश्चिम रेलवे की सबसे महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं में गिना जाता है।सबसे कठिन 13 किलोमीटर
इंदौर-खंडवा परियोजना में कुल्थाना से राजपुरा के बीच का 13 किलोमीटर हिस्सा सबसे चुनौतीपूर्ण माना जाता है। इसी सेक्शन में सात सुरंगें, सात बड़े पुल और तीन मेगा ब्रिज बनाए जाना हैं। पहाड़ी और वन क्षेत्र होने के कारण इस हिस्से के निर्माण में ज्यादा चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।
