आयोजकों का कहना है कि जैसे मथुरा और वृन्दावन में कई दिनों तक होली का उत्सव चलता है, उसी तर्ज पर संभल में भी इस बार रंगोत्सव का विस्तार किया गया। राधा-कृष्ण मंदिरों, प्राचीन कुंडों और अन्य तीर्थ स्थलों पर भजन-संध्या व सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए ।
मंदिरों के पुजारियों के अनुसार, तीर्थों के पुनर्जीवन की खुशी को सामूहिक होली के माध्यम से साझा करने का उद्देश्य है।
64 जुलूस, तीन सेक्टर में बंटा जिला
जिला प्रशासन ने 64 जुलूसों को अनुमति दी थी। बेहतर प्रबंधन के लिए जिले को तीन सेक्टर में विभाजित किया गया। 17 थानों पर मजिस्ट्रेट तैनात किए गए, जबकि 27 क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) चौबीसों घंटे सतर्क रहेंगी।
जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पेंसिया के मुताबिक, आयोजकों और अमन कमेटी के साथ बैठकों में जुलूसों के रूट, समय-सारिणी और आचार-संहिता तय कर ली गई। जुलूस “बॉक्स फॉर्मेट” में निकाले जिनके आगे-पीछे और दोनों ओर पुलिस बल की तैनाती थी, ताकि किसी भी तरह की अफवाह या अव्यवस्था की आशंका न रहे।
