भोजशाला में अखंड पूजा किसी भी स्थिति में खंडित नहीं होना चाहिए, बसंत पंचमी 23 जनवरी को मां सरस्वती की अखंड पूजा

उज्जैन(निप्र)(स्वदेश mp न्यूज़… राजेश सिंह भदौरिया बंटी) महाराजा भोज द्वारा निर्मित भोजशाला में बसंत पंचमी 23 जनवरी को अखंड पूजा होगी। भोजशाला मां सरस्वती का मंदिर है। भोजशाला के एक-एक खंबे और यहां पर लगे प्रत्येक पत्थर चीख-चीख कर कर रहे हैं की मां सरस्वती के मंदिर को तोड़कर हिंदुओं को अपमानित करने के उद्देश्य से मुगल शासक खिलजी ने यह कृत्य किया है।
         यह बात कहते हुए भारत तिब्बत समन्वय संघ के मालवा प्रांत अध्यक्ष शिवेंद्र तिवारी ने बताया कि विगत दिवस भारत तिब्बत समन्वय संघ के केंद्रीय संयोजक  हेमेंद्र प्रताप सिंह तोमर के नेतृत्व में भारत तिब्बत समन्वय संघ के पदाधिकारियो व कार्यकर्ताओं ने धार जाकर भोजशाला का अवलोकन किया। भोजशाला के अवलोकन के दौरान वहां पर मौजूद एक-एक खंभा और उस पर उकेरे प्रतीक चिन्ह या स्पष्ट बता रहे हैं कि यहां मां सरस्वती का मंदिर था। जिसे मुगल शासक खिलजी द्वारा हिंदुओं को अपमानित करने के लिए क्षतिग्रस्त कर मस्जिद बनाने का प्रयास किया गया।
श्री तिवारी ने बताया कि अवलोकन के पश्चात केंद्रीय संयोजक तोमर ने कहा कि बसंत पंचमी पर यहां अखंड पूजा होना चाहिए और किसी भी प्रकार से अखंड पूजा को खंडित नहीं किया जाना चाहिए व कहा कि मां सरस्वती की प्रतिमा जो लंदन के म्यूजियम में है उसे ससम्मान वापस लाया जाकर उसकी विधि विधान से भोजशाला में ही प्राण प्रतिष्ठा की जाना चाहिए। संघ के राष्ट्रीय सहमंत्री  निर्माण सोलंकी ने कहा कि जिन-जिन हिंदुओं द्वारा भोजशाला की मुक्ति के लिए बलिदान दिया गया है जिन-जिन लोगों ने कष्ट सहा हैं उनके त्याग को हिंदू समाज सदैव याद रखेगा।
भोजशाला के अवलोकन के दौरान भारत तिब्बत समन्वय संघ महिला विभाग की राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रो. शालिनी चतुर्वेदी(प्रयागराज)राष्ट्रीय सह मंत्री निर्माण सोलंकी(देवास)क्षेत्र अध्यक्ष आलोक मिश्रा (जबलपुर)युवा विभाग राष्ट्रीय मंत्री मदन अंबेकर (अकोला) बलराज नवानी(बुरहानपुर)डा. विवेक नाथ त्रिपाठी(लखनऊ) दुर्गा प्रसाद सिंह(उन्नाव) राजाभाऊ भदाने,देवेंद्र सोनोने सहित बड़ी संख्या में स्थानीय कार्यकर्ता एवं सनातन प्रेमी इस दौरान मौजूद थे।