शिव महापुराण में शिवरात्रि को भगवान शिव की उत्पत्ति का दिन बताया, विवाह का नहीं- महाशिवरात्रि शिवतत्व की आराधना भक्ति और आस्था का पर्व 

उज्जैन।(स्वदेश mp न्यूज़… राजेश सिंह भदौरिया बंटी) सनातन धर्म के वेदों, पुराणों और धर्मग्रंथों में भगवान शिव की महिमा, आराधना और भक्ति का विशेष महत्व बताया गया हैं जिसमें शिवरात्रि महापर्व बहुत पुण्यदायी बताया गया हैं। यह पर्व शिवतत्व को जानने और आराधना का पर्व है ना कि शिव पार्वती के विवाह का।
अखिल भारतीय पुजारी महासंघ विद्वत परिषद के रूपेश मेहता ने बताया कि शिव महापुराण में शिवरात्रि को भगवान शिव की उत्पत्ति का दिन बताया हैं जो ब्रह्मा और विष्णु के अहंकार को समाप्त करने के लिए हुआ ओर सृष्टि चक्र प्रारंभ हुआ इसलिए इस शिवरात्रि को महाशिवरात्रि कहा जाता हैं, भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह के बारे में जानकारी शिवपुराण के रुद्र संहिता में मिलती है कि उनका विवाह मार्गशीर्ष मास में सोमवार को रोहिणी नक्षत्र ओर सभी ग्रहों के शुभ स्थानों पर स्थित होने पर हुआ।इसी प्रकार माता सती से भी विवाह चैत्र मास शुक्ल पक्ष त्रयोदशी, रविवार को पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में हुआ था जो शिवपुराण के रुद्र संहिता में वर्णित है।
इस प्रकार स्पष्ट हैं कि भगवान शिव का विवाह माता सती और पार्वती से ,दोनों स्थिति मे फाल्गुन कृष्ण पक्ष चतुर्दशी अर्थात महाशिवरात्रि को नहीं हुआ । महाशिवरात्रि भगवान शिव की कृपा और भक्ति का पर्व हैं जिसका वर्णन कोटिरुद्र संहिता में मिलता हैं कि एक व्याध के भूखे प्यासे रहते अनजाने में हुए व्रत ओर चार प्रहार की पूजन केवल बेलपत्र ओर जल गिरने से हो जाने के कारण भगवान शिव प्रसन्न हो गए ओर मनवांछित फल दिया। हमारे धर्म ग्रंथों में सभी पर्वों का स्पष्ट वर्णन है इसलिए सनातन धर्मावलंबियों को हमारे वेदों पुराणों में निहित पर्वों से संबंधित नियमो का पालन करे जिससे पुण्य मिल सके और यदि उनके विपरीत कार्य होता हैं तो पाप और हानि के अलावा कुछ प्राप्त नहीं होता।

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