उज्जैन।(स्वदेश mp न्यूज़… राजेश सिंह भदौरिया बंटी) मकर संक्रांति 15 जनवरी (गुरुवार) को मनाई जाएगी। इस दिन सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, इसलिए इसे संक्रांति कहा जाता है। पुण्यकाल सुबह लगभग 7ः45 बजे से 12ः30 बजे तक रहेगा। इस समय स्नान-दान, सूर्य अर्घ्य, तिल-गुड़ दान करना विशेष शुभ माना जाता है।
प्रसिद्ध ज्योतिर्विद पं. अजय कृष्ण शंकर व्यास के अनुसार 15 जनवरी गुरुवार को मकर संक्रांति के बाद लाभ दृष्टि योग (त्रिएकादश योग) बन रहा है, जो शुक्र और शनि ग्रह के त्रिकोण होने से शुभ फल देंगे, जिससे धन लाभ, करियर में तरक्की और आर्थिक स्थिति मजबूत होने के योग हैं।
पिता-पुत्र के मिलन का दिवस मकर संक्रांति
धार्मिक-सांस्कृतिक दृष्टि से भी मकर संक्रांति का महत्व माना गया है। यह दिन सूर्यदेव अपने पुत्र शनि के घर जाते हैं। शनि मकर व कुंभ राशि का स्वामी हैं, इसलिए यह पर्व पिता-पुत्र के अनोखे मिलन से जुड़ा है। इसे देखते हुए नवग्रह शनि मंदिर परिसर में यह दिन पिता-पुत्र मधुरता दिवस के रूप में मनाया जाएगा।
खिचड़ी के दान से तीन ग्रहों के दोष होते हैं दूर
ज्योतिर्विद पंडित व्यास के अनुसार खिचड़ी का दान शुभ माना जाता है। इसमें उड़द दाल का प्रयोग किया जाता है, जिसका संबंध शनिदेव से माना गया है। चावल को अक्षय अनाज मानते हैं। नमक- वस्त्र का दान करने, तिल, शनिदेव का प्रतीक माना जाता है। इसके दान करने से शनिदोष दूर होता है। कंबल दान से राहु के अशुभ प्रभाव से बचा जा सकता है। गुड़ गुरु की प्रिय वस्तु है, इसके दान करने से शनि, गुरु, सूर्य प्रसन्न होते हैं।
सूर्य के उत्तरायण में शिशिर$बसंत$ग्रीष्म रितु का है समावेश
उत्तरायण की समाप्ति 16 जुलाई गुरुवार को होगी। कर्क संक्रांति, जब सूर्य मकर से होते-होते कर्क राशि में प्रवेश करता है, तब से दक्षिणायन शुरू हो जायेगा। उत्तरायण काल में कुल 3 ऋतुएँ रहती हैं। सूर्य जब मकर से कर्क की ओर चलता है (15 जनवरी से 16 जुलाई तक) तब उत्तरायण होगा।
उत्तरायण की ऋतुएँ शिशिर ऋतु माघ-फाल्गुन (जनवरी से मार्च) में हल्की ठंड, मौसम सुहावना तथा वसंत ऋत,ु
चैत्र-वैशाख (मार्च से मई) में हरियाली, पुष्प, उल्लास तथा ग्रीष्म ऋतु ज्येष्ठ-आषाढ़ (मई से जुलाई) में तेज गर्मी, लू चलती है। इसका सार यह है कि उत्तरायण = शिशिर $ वसंत $ ग्रीष्म ऋतु। इसी कारण उत्तरायण को देवताओं का दिन और अत्यंत शुभ काल माना गया है।
