उज्जैन।(स्वदेश mp न्यूज़… राजेश सिंह भदौरिया बंटी) अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने ग्वालियर स्थित भारतीय पर्यटन एवं यात्रा प्रबंध संस्थान टूरिज्म बोर्ड द्वारा पंडे-पुजारियों पर की गई टिप्पणी का कड़ा विरोध किया है। महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश पुजारी ने चेतावनी दी है कि संस्था अपने बयान के लिए माफी मांगे, अन्यथा उसे मानहानि और एफआईआर जैसे मुकदमों का सामना करना पड़ेगा। इसके साथ ही महासंघ ने संस्था से ‘पंडे-पुजारी नो-नो’ शब्द का स्पष्ट अर्थ भी बताने की मांग की है।
गौरतलब है कि हाल ही में टूरिज्म बोर्ड के हवाले से एक खबर प्रकाशित हुई थी जिसमें कहा गया था कि सिंहस्थ में पंडे-पुजारी श्रद्धालुओं के साथ ‘नो-नो’ और ड्राइवर मनमानी न करें, बल्कि मुस्कुराकर जय महाकाल बोलें। इस आरोप का खंडन करते हुए महासंघ ने स्पष्ट किया कि तीर्थ स्थल और मंदिर पंडे-पुजारियों के कारण ही सुरक्षित हैं। देशभर से आने वाले यात्री अपने निजी पंडों को ढूंढकर कर्मकांड करवाते हैं और ब्राह्मणों से आशीर्वाद लेते हैं। शहर में आने वाले श्रद्धालुओं के साथ पुजारियों का व्यवहार हमेशा विनम्र रहता है।
पुजारी महासंघ ने अधिकारियों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि इसके विपरीत सिंहस्थ में तैनात नौसिखिए अधिकारियों व पुलिस बल द्वारा दूर से आने वाले भक्तों के साथ किए जाने वाले दुर्व्यवहार की खबरें अक्सर मीडिया में सामने आती हैं। भीड़ प्रबंधन के नाम पर ऐसी संस्थाएं झूठ का प्रचार कर श्रद्धालुओं को मुख्य तीर्थ स्थलों तक पहुंचने नहीं देतीं।
महासंघ ने आरोप लगाया कि व्यवस्था के नाम पर भक्तों को सौ फीट दूर से ही दर्शन करवाकर बाहर कर दिया जाता है और कई बार भगवान के दर्शन तक नहीं हो पाते। आम श्रद्धालुओं को मीलों तक पैदल घुमाया जाता है। महासंघ ने नसीहत दी है कि संस्था पंडे-पुजारियों को बदनाम करने से पहले अपने अधिकारियों और कार्यकर्ताओं की व्यवस्था व व्यवहार में सुधार लाए।
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