राम मंदिर दान मामले में जांच तेज, पदाधिकारियों और कर्मचारियों तक कार्रवाई के दायरे में कई नाम

नई दिल्ली ।(स्वदेश mp न्यूज़… राजेश सिंह भदौरिया बंटी) राम मंदिर से जुड़े दान संग्रह में कथित अनियमितताओं की जांच अब एक नए और अहम मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। जांच एजेंसियों और ट्रस्ट से जुड़े सूत्रों के अनुसार श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारी स्वेच्छा से अपने पदों से अलग हो सकते हैं। माना जा रहा है कि यह कदम जांच की पारदर्शिता बनाए रखने और प्रशासनिक जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया के तहत उठाया जा सकता है। हालांकि इस पर अंतिम निर्णय अभी स्पष्ट नहीं है।

सूत्रों के मुताबिक जांच के दायरे में अब केवल संदिग्ध कर्मचारियों तक ही मामला सीमित नहीं रहा, बल्कि उन सभी जिम्मेदार पदों की भूमिका भी परखी जा रही है जिन पर दान प्रक्रिया की निगरानी और पारदर्शिता बनाए रखने की जिम्मेदारी थी। इसमें गणना करने वाले कर्मियों, कैश हैंडलिंग से जुड़े कर्मचारियों और कुछ बैंक कर्मियों की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि किसी भी वित्तीय प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना सामूहिक जिम्मेदारी होती है, और यदि इसमें चूक हुई है तो उसकी भी जांच जरूरी है।

जांच से जुड़े संकेतों के अनुसार कुछ नाम ऐसे भी सामने आए हैं जिन पर आगे चलकर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। इनमें कथित रूप से रकम के हेरफेर में शामिल कर्मचारियों के साथ कुछ बैंकिंग स्तर के लोग भी जांच के घेरे में आ सकते हैं। संभावना जताई जा रही है कि जांच पूरी होने के बाद एफआईआर दर्ज करने और गिरफ्तारी की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है, हालांकि यह जांच की दिशा और निष्कर्ष पर निर्भर करेगा।

इसी बीच ट्रस्ट प्रशासन से जुड़े कुछ वरिष्ठ नाम भी चर्चा में आए हैं। सूत्रों के अनुसार महासचिव स्तर के पदाधिकारियों सहित कुछ अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के ट्रस्ट से अलग होने की संभावना जताई जा रही है। इसे प्रशासनिक जवाबदेही और संगठनात्मक शुद्धिकरण के तौर पर देखा जा रहा है।

जांच टीम ने मंदिर परिसर में नियुक्तियों और व्यवस्थाओं की व्यापक समीक्षा भी शुरू कर दी है। 22 जनवरी 2024 को प्राण प्रतिष्ठा के बाद से अब तक की नियुक्तियों, प्रशासनिक फैसलों और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। मंदिर परिसर में लगभग 800 कर्मी कार्यरत बताए जाते हैं, जिनमें एक बड़ा हिस्सा ट्रस्ट द्वारा नियुक्त है।

सूत्रों के अनुसार सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े एक लंबे समय से तैनात कर्मी की भूमिका भी जांच के दायरे में है, जिसकी सेवा अवधि लगभग 17 वर्षों से अधिक बताई जा रही है। जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि इतने लंबे कार्यकाल में उसकी जिम्मेदारियां और कार्यक्षेत्र किस प्रकार का रहा और क्या उसमें किसी प्रकार की लापरवाही या मिलीभगत के संकेत मिलते हैं।

फिलहाल पूरा मामला जांच के प्रारंभिक लेकिन महत्वपूर्ण चरण में है, जहां दस्तावेज, बयान और प्रशासनिक रिकॉर्ड के आधार पर सच्चाई तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो सकता है कि यह जांच किन बड़े निष्कर्षों और कार्रवाई तक पहुंचती है।

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