उज्जैन,(स्वदेश mp न्यूज़… राजेश सिंह भदौरिया बंटी) प्राचीन कालगणना से जुड़ेंगे युवा – डॉ. अनिल कोठारी मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद भोपाल द्वारा डोंगला स्थित वराहमिहिर खगोलीय वेधशाला में भारतीय कालगणना परम्परा एवं खगोल विज्ञान पर केंद्रित एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला और विशाल विज्ञान प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर अंचल के 300 से अधिक स्कूली छात्र-छात्राओं, प्राचार्यों और खगोल प्रेमियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं परिषद के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी ने कहा कि यह भौगालिक क्षेत्र सदियों पहले से ही वैश्विक कालगणना और समय निर्धारण का मुख्य केंद्र रहा है। हमारे प्राचीन वैदिक और खगोलीय ग्रंथों में इसके अकाट्य प्रमाण मिलते हैं। उन्होंने बच्चों का आह्वान करते हुए कहा कि विकसित भारत’ के संकल्प को पूरा करने के लिए युवा पीढ़ी को अंतरिक्ष और खगोल विज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान के लिए आगे आना चाहिए। डॉ. कोठारी ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा डोंगला वेधशाला को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए किए जा रहे लगातार विकास कार्यों और प्रयासों की भी विस्तार से चर्चा की। इस अवसर पर नेशनल अवार्ड प्राप्त प्रसिद्ध विज्ञान प्रसारक सारिका घारू बच्चों के बीच आकर्षण का केंद्र रहीं। उन्होंने डोंगला की विशिष्ट भौगोलिक स्थिति का महत्व बताते हुए एक विशाल चलित प्रदर्शनी लगाई। सारिका घारू ने क्विज के माध्यम से फीडबैक प्राप्त किया । कार्यशाला में तकनीकी और अकादमिक सत्रों में आईआईटी इंदौर के रिसोर्स पर्सन डॉ. एन. पात्रा महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के अकादमिक निदेशक व विक्रम विश्वविद्यालय के पुरातत्वविद डॉ. रमन सोलंकी , डोंगला वेधशाला के प्रसिद्ध खगोलविद और वैज्ञानिक अधिकारी श्री घनश्याम रतनानी ने बच्चों का उपयोगी जानकारी देकर प्रोत्साहित किया । इस आयोजन को सफल बनाने में मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के संयुक्त परियोजना संचालक डॉ. मनोज कुमार राठौर, डॉ. सुनील गर्ग और डॉ. भूपेश सक्सेना की मुख्य भूमिका रही। कार्यक्रम के अंत में अतिथियों द्वारा खगोलीय गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया गया।
