सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, विशेषज्ञ समिति, ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड और उसकी उप-समिति की समीक्षा में पाया गया कि इन दवा संयोजनों का कोई ठोस चिकित्सीय आधार नहीं है. साथ ही इनके फायदे साबित करने वाले पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण भी उपलब्ध नहीं हैं.
इन दवाओं की जांच प्रक्रिया साल 2021 में शुरू हुई थी. इस दौरान उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययनों और मेडिकल डेटा का विश्लेषण किया गया. दवा कंपनियों और अन्य संबंधित पक्षों को भी अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया, लेकिन विशेषज्ञ समिति उनके तर्कों से संतुष्ट नहीं हुई. इसके बाद दिसंबर 2024 में उप-समिति ने सभी 16 दवा कॉम्बिनेशन पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की थी.
प्रतिबंधित दवाओं में Amoxicillin + Serratiopeptidase, Amoxicillin + Serratiopeptidase + Lactobacillus Sporogenes, Cefuroxime + Serratiopeptidase और Cefadroxyl + Probenecid जैसे एंटीबायोटिक कॉम्बिनेशन शामिल हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि इन दवाओं में कुछ तत्वों को एक साथ देने का कोई स्पष्ट चिकित्सीय लाभ नहीं पाया गया.
सरकार ने Dicyclomine + Paracetamol + Clidinium Bromide जैसे पेट दर्द और ऐंठन की दवाओं पर भी रोक लगाई है. इसके अलावा Gliclazide + Chromium Picolinate नामक डायबिटीज दवा कॉम्बिनेशन को भी बैन किया गया है. विशेषज्ञों का कहना है कि डायबिटीज के इलाज में Chromium Picolinate के उपयोग की सिफारिश किसी मानक चिकित्सा गाइडलाइन में नहीं की जाती.
सरकार का कहना है कि दवाओं का इस्तेमाल केवल वैज्ञानिक आधार और चिकित्सीय जरूरत के अनुसार होना चाहिए. ऐसे कॉम्बिनेशन जो मरीजों को अतिरिक्त लाभ नहीं देते और संभावित जोखिम बढ़ा सकते हैं, उन्हें बाजार में बने रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती. सरकार के इस फैसले को दवाओं के सुरक्षित और तर्कसंगत उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
