उज्जैन।(स्वदेश mp न्यूज़… राजेश सिंह भदौरिया बंटी) वर्ष 2026 के उत्तरार्ध की शुरुआत बड़े और संवेदनशील ज्योतिषीय बदलाव के साथ होने जा रही है। ग्रहों के सेनापति मंगल 21 जून को मेष से वृषभ राशि में गोचर करेंगे। मंगल देव इस राशि में 1 अगस्त तक विराजमान रहेंगे। श्री मातंगी ज्योतिष केंद्र के प्रख्यात ज्योतिर्विद पं. अजय कृष्णशंकर व्यास के अनुसार वृषभ राशि में मंगल पर न्याय के देवता शनि देव की दृष्टि रहेगी। ज्योतिष शास्त्र में शनि और मंगल के इस संबंध को बेहद प्रभावशाली माना गया है। इसका सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था, कृषि, अंतरराष्ट्रीय संबंधों और आम जनजीवन पर दिखाई देगा।
बाजार में रहेगा भारी उतार-चढ़ाव
वृषभ राशि को धन और संसाधनों का भाव माना जाता है। श्री मातंगी ज्योतिष केंद्र के ज्योतिर्विद पं. अजय कृष्णशंकर व्यास ने बताया कि मंगल के इस गोचर पर शनि की दृष्टि वैश्विक स्तर पर आर्थिक दबाव बढ़ा सकती है। खाद्यान्न, सोना, चांदी, तांबा, क्रूड ऑयल और सीमेंट-सरिया के दामों में अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। निवेशकों को बाजार में सट्टेबाजी या जल्दबाजी में निवेश से बचना चाहिए। अल्पकालिक लाभ की जगह दीर्घकालिक निवेश पर ध्यान देना फायदेमंद रहेगा।
मौसम का मिजाज बिगड़ेगा, कृषि क्षेत्र में बढ़ेगी चुनौती
वृषभ एक पृथ्वी तत्व की राशि है जिसका सीधा संबंध कृषि और प्रकृति से है। इस गोचर के प्रभाव से मौसम के मिजाज में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। देश और दुनिया के कुछ क्षेत्रों में अच्छी बारिश होगी, जबकि कुछ हिस्सों में सूखे या अतिवृष्टि जैसी असंतुलन की स्थिति बन सकती है। किसानों को अपनी फसलों को बचाने के लिए वैज्ञानिक और पारंपरिक तरीकों का उपयोग कर जल संरक्षण व फसल प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना होगा।
सीमा पर बढ़ेगा तनाव और कूटनीति की होगी परीक्षा
ज्योतिषीय ग्रंथों में मंगल और शनि के संबंध को संघर्ष और शक्ति प्रदर्शन का कारक माना गया है। ज्योतिर्विद पं. अजय कृष्णशंकर व्यास के मुताबिक इस अवधि में विभिन्न राष्ट्रों के बीच आपसी तनाव और सीमा विवाद की घटनाएं बढ़ सकती हैं। वैश्विक मंचों पर आंतरिक सुरक्षा और सामरिक नीतियों पर गहन चर्चा होगी। युद्ध जैसी स्थितियों को टालने के लिए देशों के बीच कूटनीतिक प्रयासों में तेजी लानी पड़ेगी।
शिक्षा में होंगे बदलाव, युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर देना होगा ध्यान
यह गोचर बच्चों और युवाओं से जुड़े विषयों पर भी चुनौतियां दे रहा है। शिक्षा पद्धतियों और मानसिक विकास पर सरकारों का ध्यान केंद्रित होगा तथा शिक्षा क्षेत्र में कुछ कड़े सुधारात्मक कदम उठाए जा सकते हैं। अभिभावकों को भी बच्चों की दिनचर्या, पोषण और डिजिटल तनाव से बचाव पर विशेष ध्यान देना होगा।
संकट से बचाव के लिए अचूक उपाय
गोचर के नकारात्मक प्रभावों को कम करने के लिए श्री मातंगी ज्योतिष केंद्र के ज्योतिर्विद पं. अजय कृष्णशंकर व्यास ने कुछ पारंपरिक उपाय बताए हैं। प्रत्येक मंगलवार को हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ करें। शनिवार के दिन गरीबों या जरूरतमंदों को भोजन व आवश्यक वस्तुओं का दान कर शनि देव की आराधना करें। नियमित रूप से प्रकृति और गौ-माता की सेवा करें। इस अवधि में अकारण विवाद से बचने के लिए अपनी वाणी और क्रोध पर पूरी तरह नियंत्रण रखना आवश्यक है।
