नगर निगम का अस्थायी कर्मचारी मोइनुद्दीन खान अपने पुत्र फैजान व अब्दुल के साथ करता है हफ्ता वसूलीं, फुटकर व्यापारियों ने कलेक्टर और एसपी को सौंपा ज्ञापन

उज्जैन।(स्वदेश mp न्यूज़… राजेश सिंह भदौरिया बंटी) धार्मिक नगरी उज्जैन में प्रमुख मंदिरों के आसपास फूल-प्रसाद और पूजन सामग्री बेचने वाले फुटकर व्यापारियों में भय का माहौल है। व्यापारियों ने नगर पालिक निगम के अस्थायी अतिक्रमण प्रभारी मोइनुद्दीन खान उर्फ चौधरी हेला और उसके बेटों पर अवैध वसूली, महिलाओं से अभद्रता करने और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़ित व्यापारियों ने जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को जनसुनवाई में ज्ञापन सौंपकर इस मामले में कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है।
हफ्ता नहीं देने पर करते हैं अभद्रता
हरसिद्धि मार्ग और बड़े गणेश मंदिर के पास फुटपाथ पर हार-फूल और भक्ति भंडार की दुकान लगाने वाले व्यापारियों का कहना है कि इसी से उनके परिवार का भरण-पोषण होता है। आरोप है कि नगर निगम का अस्थायी कर्मचारी मोइनुद्दीन खान और उसके पुत्र फैजान व अब्दुल उनसे दुकान लगाने के नाम पर हफ्ते की मांग करते हैं। रुपये देने से मना करने पर ये लोग पूजन सामग्री और हिंदू देवी-देवताओं की तस्वीरों को लात मारकर फेंक देते हैं और पैरों से रौंदते हैं। इसके अलावा महिलाओं के साथ अश्लील हरकतें व इशारे किए जाते हैं और गालियां देकर मारपीट की जाती है।
महापौर के निर्देशों की भी अनदेखी
व्यापारियों ने अपने आवेदन में बताया कि उन्हें महापौर द्वारा सड़क के एक तरफ अपनी पल्ली और दरी बिछाकर व्यापार करने की अनुमति दी गई है। लेकिन अतिक्रमण प्रभारी मोइनुद्दीन और उसके बेटे कहते हैं कि वे किसी को नहीं मानते और यदि सब मिलकर हफ्ता देंगे, तभी वहां दुकान लगाने देंगे।
प्रशासन से लगाई सुरक्षा की गुहार
आक्रोशित और भयभीत व्यापारियों ने प्रशासन से मांग की है कि उक्त लोगों को तत्काल निगम से हटाया जाए और उनके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई कर प्रकरण दर्ज किया जाए। साथ ही व्यापारियों को सुचारू रूप से व्यापार करने के लिए सुरक्षा प्रदान की जाए। यह जानकारी व्यापारी शिव सिंह गहलोत ने दी। ज्ञापन सौंपने वालों में मीना प्रजापत, महेश चौधरी, अब्दुल मजीद, रेखा, गौरव गोयत, जीवन माली, सुभाष, संतोष बाई, संगीता चौहान, निर्मला, देवकन्या, शिव सिंह गहलोत, जगदीश टेंट वाले सहित बड़ी संख्या में फुटकर व्यापारी उपस्थित थे।
सांकेतिक चित्र-

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