स्वागत भाषण देते हुए डॉ. राजा नागर ने अतिथि परिचय प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि गौरव धाकड़ दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ में अकादमिक सचिव रह चुके हैं तथा नेट-जेआरएफ उत्तीर्ण कर विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। साथ ही उन्होंने सामाजिक क्षेत्र एवं विश्वविद्यालय कार्य परिषद सदस्य के रूप में उनके नवाचारों पर भी प्रकाश डाला।
अपने उद्बोधन में गौरव धाकड़ ने डॉ. बी.आर. आंबेडकर के जीवन संघर्ष को “एक्सीलेंस” की वास्तविक परिभाषा से जोड़ते हुए कहा कि
“एक्सीलेंस अर्थात उत्कृष्टता केवल श्रेष्ठ अंक प्राप्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि सीमित संसाधनों को असीम संभावनाओं में बदलने और संघर्षों को सफलता की सीढ़ी बनाने का नाम है।”
उन्होंने कहा कि बाबासाहेब का जीवन इस सत्य का जीवंत उदाहरण है कि विपरीत परिस्थितियों में भी दृढ़ संकल्प, शिक्षा और निरंतर परिश्रम से असंभव को संभव बनाया जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि किस प्रकार सामाजिक विषमताओं का सामना करते हुए डॉ. आंबेडकर ने विश्वस्तरीय शिक्षा प्राप्त की और भारतीय संविधान के निर्माण में ऐतिहासिक भूमिका निभाई।
गौरव धाकड़ ने संस्थान के डायरेक्टर डॉ. राजा नागर की कार्ययात्रा की सराहना करते हुए कहा कि किसी भी संस्था की सफलता केवल संसाधनों पर नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत, अनुशासन, त्याग और स्पष्ट दृष्टिकोण पर आधारित होती है। उन्होंने इसे बाबासाहेब के संघर्ष और समर्पण की भावना का विस्तार बताया।
विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए उन्होंने चार प्रमुख सूत्र प्रस्तुत किए
शिक्षा को अधिकार के साथ-साथ कर्तव्य और शक्ति के रूप में अपनाना, अनुशासन एवं निरंतरता बनाए रखना, तथा स्वयं के साथ-साथ समाज और राष्ट्र की भी चिंता करना।
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थितों ने यह संकल्प लिया कि वे केवल सफलता ही नहीं, बल्कि उत्कृष्टता को अपने जीवन का लक्ष्य बनाएंगे और समाज में सकारात्मक परिवर्तन के वाहक बनेंगे।
कार्यक्रम का समापन अजय राणा जी के आभार प्रदर्शन के साथ हुआ।
