यह भी बताया गया कि प्रदेश में औद्योगिक को लेकर जो एक अच्छा माहौल बना है उसे बिगड़ने की कोशिश की गई है। कुछ अराजक तत्व प्रदेश के अच्छे बन रहे औद्योगिक माहौल को वर्कर्स बनाम इंडस्ट्री वर्कर्स बनाम सरकार करना चाहते हैं। लेकिन किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। सबको चिन्हित किया जा रहा है।
मुख्य सचिव दीपक कुमार ने बताया कि श्रमिकों के मुद्दों को लेकर उद्योग, श्रम विभाग, जिला प्रशासन और प्राधिकरणों के अधिकारियों की संयुक्त कमेटी बनाई गई है, जिसने दोनों पक्षों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि पूरे एनसीआर में एक “मिसइन्फॉर्मेशन कैंपेन” चलाया गया, जिसमें यह गलत जानकारी फैलाई गई कि केंद्र सरकार ने न्यूनतम वेतन 20,000 रुपये तय कर दिया है, जबकि यह प्रक्रिया अभी जारी है।
ACS MSME आलोक कुमार ने कहा कि श्रमिकों की कुछ मांगें जायज हैं, लेकिन उनके नाम पर कुछ बाहरी और अराजक तत्वों ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश के औद्योगिक माहौल को खराब करने की साजिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों की पहचान कर कार्रवाई की जाएगी। श्रमिकों ने भी प्रशासन से बातचीत में कहा कि वे वेतन बढ़ोतरी चाहते हैं, लेकिन किसी भी तरह की हिंसा के पक्ष में नहीं हैं। फिलहाल प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और शांति बनाए रखने की अपील की गई है।
