विवाह संस्कार के मुहूर्त पर हुआ व्यापक चिंतन, देशभर से 150 से अधिक प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा

उज्जैन।(स्वदेश mp न्यूज़… राजेश सिंह भदौरिया बंटी) शासकीय संस्कृत महाविद्यालय में शनिवार को ‘पंचांग परिचय और मुहूर्त विचार’ पर केंद्रित तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का भव्य समापन हुआ। यह आयोजन प्राचार्य डॉ. सीमा शर्मा के मार्गदर्शन में आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ, ज्योतिष विभाग, स्मृति विज्ञान अवंतिका शोध समिति और पूर्व छात्र परिषद के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
समापन सत्र के मुख्य अतिथि पद्मश्री डॉ. भगवतीलाल राजपुरोहित रहे। उन्होंने महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग और प्राचीन भारतीय ज्योतिर्विज्ञान के पारस्परिक संबंधों को रेखांकित करते हुए दैनिक जीवन में पंचांग के महत्व पर प्रकाश डाला। विशिष्ट अतिथि उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त संचालक डॉ. एचएल अनिजवाल ने उपस्थितजनों को संबोधित करते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्व को समझाया। वहीं सारस्वत अतिथि मंगलनाथ मंदिर के शासकीय पुजारी पंडित दीप्तेश दुबे ने कर्मकांड के क्षेत्र में ज्योतिष की उपयोगिता पर विस्तार से अपने विचार रखे।
विवाह संस्कार के मुहूर्त पर हुआ व्यापक चिंतन
आयोजन के संबंध में स्मृति विज्ञान अवंतिका शोध समिति के संस्थापक डॉ. गोपालकृष्ण शुक्ल और कार्यशाला के संयोजक यश शर्मा ने संयुक्त रूप से बताया कि तृतीय दिवस के प्रथम सत्र में विषय विशेषज्ञ के रूप में शहर के प्रख्यात ज्योतिर्विद पंडित अमर डिब्बावाला उपस्थित रहे। उन्होंने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए ज्योतिष शास्त्र के आलोक में विवाह संस्कार के मुहूर्त विषयक चिंतन को व्यापक रूप से समझाया। साथ ही तकनीकी सत्र में ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से जुड़े प्रतिभागियों से संवाद कर उनकी जिज्ञासाओं का भी समाधान किया।
देशभर से शामिल हुए प्रतिभागी
इस राष्ट्रीय कार्यशाला में सिक्किम, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश सहित अन्य राज्यों और मध्यप्रदेश के 150 से अधिक प्रतिभागियों ने हाइब्रिड मोड में सहभागिता की। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. सीमा शर्मा ने की। सत्र का सफल संचालन आईक्यूएसी समन्वयक डॉ. श्रेयस कोरान्ने ने किया तथा अंत में आभार पंडित रामचंद्र नायक ने माना।

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