यूनिवर्सिटी के इस नवाचार से छात्रों को अब साइबर कैफे के चक्कर लगाने या अतिरिक्त सेवा शुल्क देने की जरूरत नहीं होगी. परीक्षा नियंत्रक डॉ. धनाराम उईके ने बताया कि 4 फरवरी से स्नातक (UG) प्रथम वर्ष के छात्र इस ऐप का उपयोग कर सकेंगे. इसके बाद जल्द ही द्वितीय और तृतीय वर्ष के विद्यार्थियों को भी यह सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी. छात्र न केवल फॉर्म भर सकेंगे, बल्कि रिजल्ट से असंतुष्ट होने पर ऑनलाइन ही अपनी कॉपियों के पुनर्मूल्यांकन के लिए भी आवेदन कर सकेंगे.
छात्र अपने स्मार्टफोन के प्ले स्टोर से ‘आरएसएसयू छिंदवाड़ा’ नाम से इस ऐप को डाउनलोड कर सकते हैं. सुरक्षा के लिए प्रत्येक छात्र को एक यूनिक यूजर आईडी और पासवर्ड प्रदान किया जाएगा. छात्रों की सहायता के लिए यूनिवर्सिटी ने एक ‘शॉर्ट वीडियो’ भी जारी किया है, जो ऐप के संचालन की पूरी प्रक्रिया समझाएगा. कुलसचिव युवराज पाटिल ने इसे छात्रों के हित में एक क्रांतिकारी कदम बताया है.
तकनीक के साथ-साथ शोध को बढ़ावा देने के लिए यूनिवर्सिटी ने दो महत्वपूर्ण फैलोशिप ‘बादल भोई’ और ‘कुंवर रघुनाथ शाह’ शुरू की है. यह फैलोशिप उन छात्रों को दी जाएगी जो भारतीय इतिहास, स्वतंत्रता संग्राम, जनजातीय संस्कृति, कला और तकनीकी परंपराओं पर शोध करेंगे. एक वर्ष की इस फैलोशिप का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय इतिहास और सांस्कृतिक एकता के प्रमाणिक स्वरूप को सामने लाना है. यूनिवर्सिटी से संबद्ध कॉलेजों में बीए, बीकॉम, बीएससी, बीबीए और बीसीए सहित सभी प्रथम वर्ष के परीक्षा फॉर्म 4 फरवरी से 28 फरवरी तक सामान्य शुल्क के साथ भरे जाएंगे. इसके बाद विलंब शुल्क देय होगा.
