उज्जैन। 09 जनवरी 2026,(स्वदेश mp न्यूज़… राजेश सिंह भदौरिया बंटी) उज्जयिनी, जहाँ काल स्वयं नतमस्तक होता है और आस्था अनादि से अनंत की ओर प्रवाहित होती है, उसी पावन नगरी में 14 से 18 जनवरी 2026 तक आयोजित होने जा रहा श्रीमहाकाल महोत्सव केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की आत्मा का विराट उत्सव है। यह महोत्सव शिव की चेतना, लोक की परंपरा और वैश्विक सांस्कृतिक संवाद का अद्भुत संगम प्रस्तुत करेगा।
मुख्यमंत्री जी के संस्कृति सलाहकार एवं वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव श्रीराम तिवारी ने प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि महाकाल की नगरी में संगीत, नृत्य, नाट्य और लोक परंपराओं का यह समागम देश-दुनिया के सांस्कृतिक मानचित्र पर उज्जैन को एक नई ऊँचाई प्रदान करेगा।
श्रीराम तिवारी ने कहा कि श्रीमहाकाल महोत्सव, अपने स्वरूप में देश में पहली बार आयोजित हो रहा ऐसा आयोजन है, जहाँ आध्यात्म, लोक और वैश्विक संस्कृति एक साथ मंच साझा करेंगे। यह महोत्सव उज्जैन को केवल एक धार्मिक तीर्थ के रूप में नहीं, बल्कि वैश्विक सांस्कृतिक केंद्र के रूप में प्रतिष्ठित करेगा। निश्चय ही यह आयोजन देश-दुनिया में अपनी विशिष्ट पहचान बनाएगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए सांस्कृतिक प्रेरणा का स्रोत सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि इस महोत्सव में देश के विभिन्न भागों में स्थित ज्योतिर्लिंगों के महात्म्य, महिमा और देवलोक के प्रभाव से उद्भुत सांस्कृतिक रूपों को संवाद और कलारूपों के माध्यम से प्रदर्शित करने का सुनिश्चय किया गया है।
इनको किया आमंत्रित – महोत्सव में सहभागिता के लिए माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, आन्ध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री चन्द्र बाबू नायडू, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को आमंत्रित किया गया है।
ये देंगे प्रस्तुतिया- इस महोत्सव की विशेषता यह भी है कि इसमें शास्त्रीय और लोक, परंपरा और आधुनिकता, देशज और वैश्विक सभी धाराएँ एक साथ प्रवाहित होंगी। सुप्रसिद्ध पार्श्व गायक शंकर महादेवन-सिद्धार्थ-शिवम् की त्रयी जब शिव-भक्ति और भारतीय संगीत की ऊँचाइयों को स्वर देगी, तब वह क्षण केवल श्रवण का नहीं, साधना का होगा। सोना महापात्रा की ओजस्वी और भावपूर्ण प्रस्तुति, द ग्रेट इंडियन क्वायर, विपिन अनेजा और श्रेयस शुक्ला जैसे कलाकारों की सहभागिता इस मंच को समकालीन सूजन का सशक्त स्वर प्रदान करेगी।
निकलेगी कला यात्रा- न्यासी सचिव ने बताया कि महोत्सव का एक अत्यंत महत्वपूर्ण आयाम है जनजातीय लोक कला। प्रतिदिन उज्जैन के विभिन्न स्थलों से निकलने वाली कला यात्राएँ, जनजातीय संस्कृति की जीवंतता, रंगों, वाद्यों और नृत्य की लय के साथ श्रीमहाकाल महालोक परिसर तक पहुंचेंगी। यह यात्रा केवल मार्ग की नहीं होगी, बल्कि पीढ़ियों से संचित परंपराओं की चेतना को वर्तमान से जोड़ने का माध्यम बनेगी। जनजातीय कलाकारों की प्रस्तुतियाँ इस आयोजन का हृदय होंगी, जो लोक की जड़ों से जुड़ी भारत की सांस्कृतिक शक्ति को अभिव्यक्त करेंगी। इस महोत्सव की एक ऐतिहासिक विशेषता यह भी है कि इंडोनेशिया और श्रीलंका के नाट्य दलों की सहभागिता के माध्यम से भारत की प्राचीन सांस्कृतिक कड़ियों का पुनस्मरण होगा। यह सहभागिता सिद्ध करती है कि भारत की सभ्यता केवल भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि उसने वैश्विक भूभाग में सांस्कृतिक सेतु निर्मित किए हैं।
यह महोत्सव वीर भारत न्यास, श्रीमहाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा संस्कृति संचालनालय, जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी, त्रिवेणी संग्रहालय, कृषि उद्योग विकास परिषद्, उज्जैन विकास प्राधिकरण, जिला प्रशासन एवं नगर निगम उज्जैन की सहभागिता में आयोजित किया जा रहा है।
