श्रावण माह के दूसरे सोमवार पालकी में भगवान श्री चन्द्रमोलेश्वर व श्री मनमहेश हाथी पर विराजित होकर अपने भक्तों का कुशल-क्षेम लेने नगर भ्रमण पर निकले

उज्जैन 10 अगस्त 2026 ।(स्वदेश mp न्यूज़… राजेश सिंह भदौरिया बंटी) श्रावण के दूसरे सोमवार पर भगवान श्री महाकालेश्वर जी पालकी में श्री चन्द्रमोलेश्वर रूप में तथा हाथी पर श्री मनमहेश के स्वरूप में अपने भक्तों को दर्शन देने और अपनी प्रजा का कुशल-मंगल जानने नगर भ्रमण पर निकले। सवारी के पूर्व सभामंडप में पूजन-अर्चन मुख्य पुजारी पं. घनश्याम शर्मा द्वारा संपन्न कराया गया। सर्वप्रथम भगवान श्री महाकालेश्वर भगवान का षोडशोपचार से पूजन-अर्चन किया गया। इसके पश्चात भगवान की आरती की गई। श्रावण माह के दूसरे सोमवार भगवान महाकाल की सवारी धूमधाम से निकाली गई। श्री महाकालेश्वर मंदिर के सभामंडप में भगवान श्री चन्द्रमोलेश्वर का पूजन अर्चन कर देश एवं प्रदेश की सुख समृद्धि और विकास की कामना की। इस दौरान सभामंडप में संभागायुक्त आशीष सिंह, पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा, श्री महाकालेश्वर मंदिर के कलेक्टर एवं अध्यक्ष रोशन कुमार सिंह, मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक व अन्य अधिकारियों ने भगवान श्री चंद्रमोलेश्वर जी का पूजन-अर्चन किया और आरती में सम्मिलित हुए।

मार्ग में श्रद्धालुओं ने जय श्री महाकाल के घोष के साथ पुष्प वर्षा की

भगवान श्री चन्द्रमोलेश्वर पालकी में सवार होकर अपनी प्रजा का हाल जानने और भक्तों को दर्शन देने के लिए नगर भ्रमण पर निकले। पालकी जैसे ही श्री महाकालेश्वर मंदिर के मुख्य द्वार पर पहुंची सशस्त्र पुलिस बल के जवानों द्वारा पालकी में सवार भगवान श्री चन्द्रमोलेश्वर जी को सलामी (गार्ड ऑफ ऑनर) दी गई। सवारी के आगे श्री महाकालेश्वर बैंड, लोक कला नृत्य एवं जनजातीय लोक नृत्य कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति दी। सवारी मार्ग में स्थान-स्थान पर खडे श्रद्धालुओं ने जय श्री महाकाल के घोष के साथ अवन्तिका नगरी के राजाधिराज पालकी में विराजित भगवान श्री चन्द्रमोलेश्वर व हाथी पर आरूढ़ भगवान श्री मनमहेश पर पुष्पवर्षा की | भगवान श्री महाकालेश्वर की दूसरी सवारी के दौरान क्षिप्रा नदी के तट पर भगवान श्री महाकालेश्वर के चंद्रमोलेश्वर स्वरुप में पालकी पहुंचने के बाद क्षिप्रा नदी के जल से उनका पूजन अर्चन किया । भगवान श्री महाकालेश्वर की पालकी के रामघाट पहुंचने पर शंख-नाद किया गया । इसके पश्चात विधिवत भगवान श्री महाकालेश्वर का पूजन अर्चन संपन्न हुआ और भगवान श्री महाकालेश्वर की आरती की गई । आरती के पश्चात भगवान श्री चंद्रमोलेश्वर स्वरुप में भक्तों का हाल जानने के लिए नगर भ्रमण पर निकले । इस दौरान भक्तजन बड़ी संख्या में सवारी में सम्मिलित हुए ।

बाबा महाकाल की एक झलक के लिए असंख्य श्रद्धालु हुए आतुर

श्रावण के दूसरे सोमवार पर भगवान की सवारी के दौरान उज्जैन नगरी शिवमय हो गई। श्री महाकालेश्वर भगवान की सवारी में हजारों भक्तों ने झांझ, मंजीरे, डमरू, ढोल आदि वाद्य बजाते हुए महाकाल की आराधना करते हुए पालकी के साथ चल रहे थे। उज्जैन के बाहर से आये हुए भक्तगण बाबा महाकाल की एक झलक पाने के लिए उत्सुक थे। श्री महाकालेश्वर भगवान की सवारी महाकाल मंदिर से गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार, कहारवाडी होते हुए रामघाट पहुंची रामघाट पर श्री चन्द्रमोलेश्वर व श्री मनमहेश का मॉ क्षिप्रा के जल से अभिषेक पूजन किया गया। पूजन -अर्चन के बाद भगवान महाकाल की सवारी रामघाट से रामानुज कोट, मोढ की धर्मशाला, कार्तिकचौक, खाती का मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, छत्री चौक होते हुए गोपाल मंदिर पहुंची। जहॉ परंपरानुसार सिंधिया स्टेट की ओर से गोपाल मंदिर के पुजारी द्वारा पालकी में विराजित श्री चन्द्रमोलेश्वर का पूजन किया गया। इसके पश्चात सवारी गोपाल मंदिर से पटनी बाजार, गुदरी चौराहा होते हुए श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंची। जहाँ पुनः आरती उपरांत सवारी का विश्राम हुआ।

भगवान श्री महाकालेश्वर जी की द्वितीय में मध्यरप्रदेश के विभिन्न जनजातीय कलाकारों ने दी मनमोहक प्रस्तुतियां

भगवान श्री महाकालेश्वर जी की सवारी को अधिक भव्य रूप देने हेतु प्रत्येक सवारी में अलग-अलग थीम रखी गई है जिसमें मध्यप्रदेश की समृद्ध आदिवासी लोक संस्कृति और परंपराओं को मंच पर जीवंत करने के लिए रामलीला आदिवासी नर्तक मंडली, छायन पश्चिम, पेटलावद, झाबुआ द्वारा भगोरिया लोकनृत्य की आकर्षक प्रस्तुति दी गई। भील और भिलाला जनजाति की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा भगोरिया अपनी रंग-बिरंगी वेशभूषा, लोकसंगीत और उत्साहपूर्ण नृत्य मुद्राओं के लिए प्रसिद्ध है। भगोरिया मुख्य रूप से होली से पहले झाबुआ, अलीराजपुर, धार और बड़वानी अंचल में लगने वाले भगोरिया हाटों में मनाया जाता है। यह फसल कटाई की खुशी, फागुन के उल्लास और सामुदायिक उत्सव का प्रतीक है। पारंपरिक रूप से पुरुष धोती-कुर्ता तथा महिलाएं आकर्षक पारंपरिक परिधान और आभूषण धारण कर नृत्य में शामिल होती हैं। ढोल-मांदल की थाप पर थिरकते कदम और आकर्षक समूह संरचनाएं भगोरिया प्रस्तुति का विशेष आकर्षण रहा। कलाकार ढोल, मांदल, थाली और बांसुरी जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों की लय पर पाली, चक्रीपाली और पिरामिड जैसी समूह नृत्य संरचनाएं बनाते हुए आदिवासी जीवन, उमंग और उत्सवधर्मिता को सवारी मार्ग में विविध एवं आकर्षक प्रस्तु्तियां दी। भगोरिया केवल एक लोकनृत्य नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश की आदिवासी विरासत, प्रकृति से जुड़ाव, सामूहिकता और लोकजीवन की जीवंत अभिव्यक्ति है। रामलीला आदिवासी नर्तक मंडली की प्रस्तुति के माध्यम से दर्शकों को झाबुआ अंचल की इसी अनूठी सांस्कृतिक परंपरा से रूबरू होने का अवसर मिला।

उज्जैन के प्रसिद्ध लोकनृत्य संस्थानों द्वारा भगवान श्री महाकालेश्वर मंदिर परिसर में पालकी के सामने अपनी नृत्यांलजली अर्पित की

उज्जैन की प्रमुख संस्था प्रतिभा संगीत कला संस्थान तथा लोकायन संस्थान द्वारा करीब 50 नृत्यांगनाओं द्वारा श्री महाकाल मंदिर परिसर में भगवान श्री महाकालेश्वर जी की पालकी के सामने प्रतिभा रघुवंशी तथा प्रज्ञा गढ़वाल जी के मार्गदर्शन में अद्भुत नृत्य प्रदर्शन किया और भगवान भोलेनाथ की आराधना अपने नृत्य के माध्यम से की । विशेष बात यह रही कि श्री महाकालेश्वर मंदिर के बैंड की धुन पर नृत्य करने का यह एक अनूठा संयोग बना। रिमझिम बरसते पानी में जहां भगवान भोलेनाथ का अभिषेक हो रहा था वही नृत्यांगनाओं द्वारा नृत्य के माध्यम से अपनी साधना अंजलि अर्पित की।

चलित रथ में लगी एलईडी से श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

बाबा महाकाल की सवारी के दर्शन के लिए सवारी के आगे और पीछे दो एलईडी लगे 2 रथ चलें , जिस पर सवारी के लाइव प्रसारण के माध्यम से श्रद्धालुओं ने सुगमता पूर्वक दर्शन किए। लाइव दर्शन एवं लाइव टेलीकास्ट हेतु हाईटेक चार बड़ी एलईडी वाहनों लाईव एलईडी रथ के माध्यम से फ्रीगंज क्षेत्र, दत्त अखाड़ा क्षेत्र ,श्री महाकालेश्वर त्रिवेणी द्वार व उज्जैन के प्रमुख मार्गो पर भक्त लाइव प्रसारण देख सकते है | जो श्रद्धालु व उज्जैनवासी सवारी में नही सम्मिलित हो सकते वह चलित रथ पर सवारी के लाइव दर्शन का आनन्द ले सकते है | साथ ही मंदिर प्रबंध समिति द्वारा आयोजित अखिल भारतीय श्रावण महोत्सव 2026 श्री महाकालेश्वर सांस्कृतिक संध्या 2026 का प्रसारण भी लाइव रथ पर किया जा रहा है | सम्पूर्ण सवारी मार्ग पर लगभग 7.80 लाख भक्तो ने श्री महाकालेश्वर भगवान जी के श्री चन्द्रमोलेश्वर व श्री मनमहेश स्वरूप के दर्शन किये। श्री महाकालेश्वर भगवान की तीसरी सवारी 17 अगस्त 2026 सोमवार को निकाली जायेगी। इस दौरान पालकी में भगवान श्री चन्द्रमौलेश्वर के स्वरूप में रहेंगे, हाथी पर श्री मनमहेश के स्वरूप में और गरूड़ रथ पर शिवतांडव के स्वरूप में विराजित होंगे।