टीटीडी ने ‘साइलेंट तिरुमाला इनिशिएटिव’ के तहत यह अभियान शुरू किया है. श्रद्धालुओं को जागरूक करने के लिए तिरुमाला जाने वाले प्रमुख मार्गों और घाट रोड पर जगह-जगह सूचना बोर्ड लगाए गए हैं. अधिकारियों ने वाहन चालकों से अपील की है कि वह तिरुमाला की पहाड़ी पर हॉर्न और सायरन का इस्तेमाल न करें, ताकि श्रद्धालुओं को शांत और भक्तिमय वातावरण मिल सके.
टीटीडी के अनुसार यह नियम सभी प्रकार के वाहनों पर लागू होगा. इसमें निजी वाहन, टैक्सी, आरटीसी बसें, पुलिस वाहन और अन्य सरकारी वाहन भी शामिल हैं. केवल आपातकालीन स्थिति में ही सायरन या हॉर्न का उपयोग किया जा सकेगा. तिरुमाला सतर्कता विभाग और पुलिस श्रद्धालुओं को लगातार इस नियम के बारे में जागरूक कर रहे हैं.
अधिकारियों के मुताबिक, पहले प्रतिदिन करीब 8,000 वाहन तिरुमाला पहुंचते थे, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर लगभग 10,000 प्रतिदिन हो गई है. सप्ताह के लास्ट, त्योहारों और छुट्टियों के दौरान वाहनों की संख्या और अधिक बढ़ जाती है. अलीपिरी चेक पोस्ट पर लंबी कतारें लगने से ध्वनि प्रदूषण भी बढ़ रहा है. इसी को देखते हुए हॉर्न पर प्रतिबंध का फैसला लिया गया है.
टीटीडी ने स्पष्ट किया है कि तिरुमाला को शांत क्षेत्र बनाए रखने के लिए इस नियम का सख्ती से पालन कराया जाएगा. आमतौर पर धार्मिक स्थलों के आसपास ध्वनि स्तर दिन में 50 डेसिबल और रात में 40 डेसिबल से अधिक नहीं होना चाहिए.
ऐसे में यदि कोई वाहन चालक नए नियम का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई करते हुए जुर्माना भी लगाया जा सकता है.टीटीडी ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वह यात्रा के दौरान नियमों का पालन करें और तिरुमाला के आध्यात्मिक एवं शांत वातावरण को बनाए रखने में सहयोग दें.
