उज्जैन।(स्वदेश mp न्यूज़… राजेश सिंह भदौरिया बंटी) शनिवार को टंकी चोराहे से दनीगेट मार्ग का चोडीकारण कार्य शुरू हो गया,आज स्वेच्छा से लोगो ने अपने मकानों का हिस्सा तोडा, वही शहर के प्रमुख कोयला फाटक से गोपाल मंदिर मार्ग के चौड़ीकरण में आ रही बाधाओं को लेकर स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश है। एक ओर जहां सैकड़ों गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों ने शहर के विकास के लिए अपने आशियाने और दुकानें खुद ही तोड़ दीं, वहीं केवल पांच रसूखदार और करोड़पति परिवार इस महत्वपूर्ण योजना का विरोध कर रहे हैं। इस विरोध के कारण निर्माण कार्य की गति धीमी हो गई है, जिससे कंठाल से गोपाल मंदिर तक रोज भारी ट्रैफिक जाम लग रहा है और स्कूली बसें फंस रही हैं।
अरविंद मेदेवाला ने बताया कि इस स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट का मनीष गुप्ता, भरत जैन, अनिल गादिया, सौभागमल गादिया और प्रदीप गादिया द्वारा विरोध किया जा रहा है। आरोप है कि ये सभी करोड़पति हैं और इनके मकानों की गहराई 65 से 100 फीट तक है। मनीष गुप्ता के मकान की गहराई 90 फीट, भरत जैन की 100 फीट और प्रदीप गादिया की 65 फीट है। इसके बावजूद ये लोग शहर के विकास के लिए मात्र 10 फीट जगह देने को तैयार नहीं हैं। मांग की गई है कि नगर निगम इनके मकानों की वास्तविक गहराई की माप करे और इनके द्वारा भारी मुआवजे की मांग को देखते हुए इनकम टैक्स विभाग इनके आय के साधनों की जांच करे।
सरकारी ठेके लेने वालों पर उठे सवाल
विरोध करने वालों की मंशा पर सवाल उठाते हुए बताया गया है कि ये लोग एक तरफ तो राज्य सरकार की महत्वपूर्ण विकास योजनाओं में रोड़ा अटका रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकार से ही ठेके प्राप्त कर रहे हैं। प्रदीप गादिया ने पूर्व में कोरोना काल के दौरान सरकार से सैनिटाइजर का ठेका लिया था और इसके बाद बैरिकेड्स निर्माण का टेंडर भी हासिल किया। अरविंद मेदेवाला ने सवाल उठाया है कि मुख्यमंत्री उज्जैन को स्मार्ट सिटी बनाने का बेहतरीन प्रयास कर रहे हैं, ऐसे में सरकारी योजनाओं का लाभ लेने वाले ही इसका विरोध क्यों कर रहे हैं?
1980 के मास्टर प्लान का 2026 में क्रियान्वयन
गौरतलब है कि 1980 में तत्कालीन कलेक्टर बुश ने कोयला फाटक से गोपाल मंदिर मार्ग के चौड़ीकरण की आवश्यकता जताई थी। तब से यह प्रोजेक्ट मास्टर प्लान में शामिल है। 1980 से लेकर अब तक शहर की जनसंख्या और वाहनों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। दशकों से अटका यह मास्टर प्लान अब 2026 में लागू हो रहा है, फिर भी कुछ लोग सहयोग नहीं कर रहे हैं।
न्यायालय से अपील: स्टे देने से पहले देखें शहर का हाल
विरोध करने वालों का मुख्य उद्देश्य किसी भी तरह कानूनी दांवपेच में उलझाकर चौड़ीकरण को टालना है, ताकि 2028 का सिंहस्थ नजदीक आ जाए और प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में चला जाए। शहरवासियों ने न्यायालय से अपील की है कि वह इस मामले में कोई भी स्टे (स्थगन आदेश) देने से पहले उज्जैन शहर और इस मार्ग की वर्तमान हालत देखे। कंठाल से गोपाल मंदिर तक के सीसीटीवी कैमरों के फुटेज देखने मात्र से यह स्पष्ट हो जाएगा कि यहां हर रोज किस तरह का भीषण जाम लगता है और आम जनता कितनी परेशान होती है।
अरविंद मेदेवाला ने बताया कि पुराने शहर में 8 चौराहों का पैसा 3 से अधिक बार पास हुआ। पैसा सरकार के खाते में भी आया लेकिन विरोध करने वालों के कारण ये कभी बन ही नहीं पाए।

