सनातन धर्म को बचाने के लिए खत्म हो वीआईपी प्रथा,प्रधानमंत्री से देवालयों में वीआईपी प्रवेश प्रतिबंधित कानून बनाने की मांग

उज्जैन।(स्वदेश mp न्यूज़… राजेश सिंह भदौरिया बंटी) वर्तमान में सनातन धर्मावलंबियों पर अंकुश ओर प्रतिबंध देखा जा रहा हैं जिसके कारण धर्म को मानने वाले करोड़ों लोगों मे सरकार के प्रति अविश्वास और असंतोष फैल रहा हैं।

देश में जहां बीजेपी की सरकार हैं वहां यह सब ज्यादा देखने को मिल रहा हैं,उत्तर प्रदेश और अन्य प्रदेशों संतों, पुजारियों और सेवायतन पर अत्याचार, शोषण और अपमान हो रहा हैं। जिसे रोकने के लिए अखिल भारतीय पुजारी महासंघ राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश पुजारी और सचिव रूपेश मेहता ने माननीय प्रधानमंत्री महोदय को पत्र भेजकर देश के मंदिरों देवालयों में वीआईपी प्रथा खत्म करने ओर वीआईपी प्रवेश प्रतिबंधित कानून बनाने की मांग की हैं। क्योंकि हाल ही में यूपी के (वृंदावन) बांके बिहारी मंदिर में बीजेपी के नए अध्यक्ष, मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष के आने पर वहां के पुजारी, सेवादार और उनके परिवार की महिलाओं को सुरक्षा के नाम पर रोका गया ,उन्हें अपमानित किया गया और पुलिस बल का प्रयोग कर खदेड़ा गया जो सनातन धर्म में सीधे हस्तक्षेप हैं।
प्रयाग में भी सनातन धर्म के सर्वोच्च धर्माधिकारी शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जी के साथ भी अभद्रता कर उन्हें स्नान करने से रोका गया, छोटे छोटे बटुकों की चोटी पकड़कर घसीटा गया पैरों से रौंदा गया और अपमानित किया गया।
इसी प्रकार कुछ दिन पूर्व प्रदेश के नलखेड़ा (बगलामुखी माताजी) में भी अधिकारियों द्वारा ब्राह्मणों, पुजारियों को हवन पूजन से रोका गया।
सनातन धर्मावलंबियों की ओर से योगी आदित्यनाथ जी से जानना चाहते हैं कि आने वाले समय में यदि किसी अन्य दल का मुख्यमंत्री, गोरखपुर पीठ में दर्शन करने जाता है और पुलिस द्वारा मठ के सेवादार ओर संतों को सुरक्षा के नाम पर मठ से बाहर करने का प्रयास किया जाता है,जैसा वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में हुआ हैं तो क्या वह (योगी जी) स्वीकार करेंगे?
पत्र का उद्देश्य देश के मंदिरों में सनातन धर्म की व्यवस्था को बचाने के साथ पुजारी और सेवादार के मान सम्मान को बचाना है इसलिए पुजारी महासंघ ने मांग की है कि ऐसा कानून देश में लाया जाय जिससे मंदिरों कि परंपरा पूजा पद्धति,सहित पुजारी और सेवादारों  कि नित्य पूजा पद्धति सुरक्षा और वीआईपी प्रवेश के नाम पर नहीं रोके जावे।जिसके कारण देश के मंदिरों के पुजारी, सेवादार ओर आम श्रद्धालु भयभीत हैं इसलिए सनातन धर्म को बचाने के लिए देश में संवैधानिक पदों पर आसीन नेता या अधिकारी जब तक अपने पद पर बने रहे तब तक वह अपने पद के प्रोटोकॉल का उपयोग कर मंदिर नहीं जा सके, केवल आम श्रद्धालु की तरह मंदिर जावे।

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