उज्जैन।(स्वदेश mp न्यूज़… राजेश सिंह भदौरिया बंटी) सनातन धर्म में शंकराचार्य की स्थापना, पदवी और पद स्वयं स्थापित हैं जैसे देश के 12 ज्योतिर्लिंग स्वयं भु हैं। ऐसा ही शंकाराचार्य पद है। भारत में जब सनातन धर्म को ठेस पहुंचाने की चेष्टा की जा रही थी उस समय भगवान शंकर के अंश आद्य शंकराचार्य जी की उत्पति हुई और उन्होंने सनातन धर्म को बचाने के लिए भारत का भ्रमण करते हुए, जहां शास्त्रों के माध्यम से परास्त करना वहां शास्त्र और जहां शस्त्र से परास्त करना था वहां शस्त्र। अखिल भारतीय पुजारी महासंघ राष्ट्रीय सचिव रूपेश मेहता ने यह बताते हुए कहा कि आद्यशंकराचार्य जी ने अखाड़ों का निर्माण सनातन धर्म को बचाने के लिए एक फौज तैयार की थी। उनके आदेश का पालन करती थी। जिस प्रकार खेत को बचाने के लिए बागर लगाई जाती है। यदि वही बागर खेत को खराब करने या खाने लग जाए तो खेत में बागर की क्या आवश्यकता ?
उसी प्रकार अखाड़ा परिषद द्वारा आज बागर का कार्य कर शंकराचार्य पर आरोप व प्रत्यारोप कर रही है और शंकराचार्य जी को यह 13 अखाड़े द्वारा चादर उड़ाकर और प्रमाणित करने की को चेष्टा की जा रही है। उसकी निंदा करते हुए अखिल भारतीय पुजारी महासंघ चारों शंकराचार्य से यह निवेदन करता है कि देश में अब अखाड़ों की कोई अवश्यकता नहीं है
चादर दरगाह एवं मजारों पर मुस्लिम समाज उनके धर्मानुसार चढ़ाते हैं अखाड़ा परिषद के वरिष्ठ पदाधिकारी द्वारा शंकराचार्य जी को चादर उड़ाने के बाद ही मान्यता देने की बात की है उसकी अखिल भारतीय पुजारी महासंघ कड़े शब्दों में निंदा करता हैं। यह देश ऋषि मुनियों का है ना कि 13 अखाड़ों और साधु संतों का इसलिए अब चादर ओढ़ाने की प्रथा को बंद किया जाना चाहिए ओर अब इस देश में शंकराचार्य जी को शंकरानन्द अखाड़े के नाम से स्वयं का अखाड़ा स्थापित करना चाहिए। इसलिए अब 13 अखाड़ों की देश को कोई अवश्यकता नहीं।
