रविंद्रपुरी जी स्वयं को सनातन का मुखिया मानते है, तो धार की भोजशाला में अखंड पुजा के लिए संघर्ष करें। – महाकाल सेना

उज्जैन।(स्वदेश mp न्यूज़… राजेश सिंह भदौरिया बंटी) पिछले दिनों अखाड़ा परिषद अध्यक्ष रवींद्रपुरी जी ने महाकाल मंदिर के पुजारियों और महाकाल सेना के विषय में अनर्गल टिप्पणी कर पुजारियों, ब्राह्मणों और महाकाल सेना के हजारों सदस्यों सहित सनातन धर्मावलंबियों के मान सम्मान पर कुठाराघात किया हैं।जो असहनीय है।यदि रविंद्रपुरी जी स्वयं को सनातन का मुखिया मानते है, तो धार की भोजशाला में अखंड पुजा के लिए संघर्ष करें। अपने नागाओं की फौज को वहां भेजे।
जब मंदिरों की मर्यादा ,परम्परा,पवित्रता और ड्रेस कोड का पालन देश के आम व्यक्ति से लेकर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री सभी करते है तो अखाड़ों के साधु संतों और महामण्डलेश्वरों को भी पालन करना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं हो रहा हैं जब वह मंदिर में प्रवेश करते हैं तो उन्हें मंदिर की मर्यादा ,परंपरा और विग्रह के बारे में कोई जानकारी नहीं होती, जिसके कारण वह लोग मंदिर की मर्यादा प्रतिष्ठा को ताक पर रखकर केवल अपने पद,अहम और मद में चूर होकर मंदिरों में जाते हैं,मर्यादाओं ओर पवित्रता को भंग करते हैं विवाद करते हैं क्योंकि देश में अखाड़ों ने अनगिनत संत, महंत, महामंडलेश्वर बिना किसी योग्यता और कसौटी के बना दिए हैं यह ऐसा प्रतीत होता है जैसा सब्जी मंडी का बाजार लगा हो।
अखाड़ों ने महामंडलेश्वर महंत आदि की लाइन लगा दी है।अखाड़ों द्वारा बनाए जाने वाले साधु संतों और महामंडलेश्वर की योग्यता का कोई प्रमाण नहीं होता।जब साधु संतों ने सांसारिक जीवन त्यागकर अपना पिंडदान कर दिया है तो बार बार सांसारिक जीवन या जनमानस में वापस आकर भोग विलासता के जीवन में रहकर सनातन धर्म को दूषित कर दिया हैं।साधु संत को पद और प्रतिष्ठा की लालसा नहीं होनी चाहिए साधु तो त्याग का प्रतीक हैं जैसे जैन समाज का साधु।
जब अखाड़ों को अपने सन्यासी जीवन और मंदिरों की मर्यादा परंपराओं का ज्ञान ही नहीं है तो देश में अखाड़ों की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि आद्यशंकराचार्य जी द्वारा देश में सनातन धर्म की रक्षा के लिए अखाड़े बनाए थे ,उस समय देश की फौज नहीं थी ,कोई संविधान नहीं था, लेकिन वर्तमान में भारत देश की अपनी फौजी है जो दुश्मनों से लड़ रही है अपना संविधान है जो सभी को बराबरी का हक देता हैं इसलिए आज अखाड़ों का कोई महत्व नहीं है और ना ही इनकी कोई आवश्यकता है।
देश में केवल शंकराचार्य ही सनातन धर्म को चलाने के लिए काफी है
देश के यशस्वी प्रधानमंत्री जी और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री महोदय से महाकाल सेना मांग करती हैं सरकार को यह जांच करनी चाहिए कि अखाड़ा परिषद अध्यक्ष को कितने अखाड़ों का समर्थन प्राप्त है। क्योंकि 03 अखाड़ों ने तो अखाड़ा परिषद का बहिष्कार कर दिया है यदि अखाड़ा परिषद अधूरी हैं तो अखाड़ा परिषद का सही और असली अध्यक्ष कौन है?
साथ ही देश और प्रदेश में अखाड़ों को कोई अधिकारिक मान्यता नहीं है इसलिए सरकार इनके साथ आम नागरिक के समान व्यवहार करे।क्योंकि यह लोग अपने पद का सरकार पर अनुचित दबाव बनाकर मनमानी करते हैं। देश में अब अखाड़ों की कोई आवश्यकता नहीं रही,सनातन धर्म के लिए केवल शंकराचार्य का वचन ही मान्य होगा।
महाकाल सेना धर्म प्रकोष्ठ राष्ट्रीय प्रमुख महेंद्र सिंह बैंस और प्रदेश प्रमुख अशोक राठौर ने कहा कि सनातन धर्म में शंकराचार्य जी के बाद मंदिर के पुजारी ही सर्वमान्य है जिन्हें धर्मशास्त्रों में भगवान का पार्षद कहा गया हैं फिर भी अखाड़ा परिषद अध्यक्ष ने जिस प्रकार महाकाल मंदिर में केवल मुख्य पुजारी के द्वारा पूजन करने और अन्य पुजारी ओर प्रतिनिधियों आदि को गर्भगृह नहीं जाने देने की सरकार से मांग की है उसकी महाकाल सेना निंदा करती हैं।