उज्जैन।(स्वदेश mp न्यूज़… राजेश सिंह भदौरिया बंटी) शहर की सड़कों और चौराहों पर ई-रिक्शा चालकों की मनमानी और लापरवाही के कारण यातायात व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है। क्षमता से अधिक ई-रिक्शा और ऑटो रिक्शा के संचालन से शहर भर में भारी जाम की स्थिति निर्मित हो रही है। यातायात पुलिस और आरटीओ की लापरवाही तथा स्टाफ की कमी के चलते नियम सिर्फ कागजों पर संचालित हो रहे हैं और धरातल पर इनका कोई क्रियान्वयन नहीं हो रहा है।
ज्ञात हो कि वर्ष 2024-2025 में आरटीओ ने शहर को 7 जोन में बांटकर ई-रिक्शा चलाने के आदेश जारी किए थे। ई-रिक्शा चालक संघ के विरोध के बाद प्रशासन ने रूट निरस्त कर चालकों की मंशानुसार 12-12 घंटे की दो शिफ्ट में संचालन की अनुमति दी थी। वर्ष 2025-2026 में भी ई-रिक्शा को शिफ्टिंग में ही चलाया जाना तय हुआ था, लेकिन चालक बिना अनुमति के 24 घंटे वाहन दौड़ा रहे हैं। आरटीओ द्वारा लगातार नए ई-रिक्शा और ऑटो रिक्शा का पंजीयन किया जा रहा है, जिससे जाम की समस्या विकराल हो गई है। वर्तमान में नरसिंह घाट चौराहे जैसे नो-व्हीकल जोन में 50 से अधिक ई-रिक्शा बीच सड़क पर खड़े रहते हैं और चालक अनियंत्रित रूप से वाहन दौड़ा रहे हैं।
स्थिति यह है कि शहर में कई ई-रिक्शा नाबालिगों द्वारा चलाए जा रहे हैं और शराबी चालक भी ई-रिक्शा चला रहे हैं। इससे बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं और आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
यातायात की इस बिगड़ती स्थिति को देखते हुए युवा भगवा जागरण मंच के उपाध्यक्ष रविंद्र कार्तिकेय ने माननीय मुख्यमंत्री, जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से अति शीघ्र हस्तक्षेप की मांग की है। मंच ने मांग की है कि नाबालिग और शराबी चालकों की सख्ती से चेकिंग की जाए तथा ई-रिक्शा चालकों की मनमानी पर अंकुश लगाया जाए। इसके साथ ही, बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के चार पहिया वाहनों को महाकाल मंदिर परिसर से 2 किलोमीटर दूर पार्किंग बनाकर रोका जाए ताकि शहर और महाकाल क्षेत्र का यातायात सुगम हो सके।
